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Bhagalpur News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की समीक्षा के बाद फैसला; विक्रमशिला सेतु से सिर्फ हल्के वाहनों को अनुमति

बिहार के भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन करने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. लंबे समय से यातायात पूरी तरह बाधित होने के बाद अब विक्रमशिला सेतु पर बनाए गए अत्याधुनिक बेली ब्रिज से 7 जून से हल्के वाहनों का परिचालन शुरू किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है. राज्य सरकार ने आम लोगों की रोजमर्रा की असुविधा और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा फैसला लिया है. हालांकि, सुरक्षा कारणों से अभी केवल छोटी और हल्की गाड़ियों को ही पुल से गुजरने की अनुमति मिलेगी, जबकि भारी और ओवरलोड वाहनों पर प्रतिबंध पूरी तरह जारी रहेगा.

🔍 मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की समीक्षा के बाद लिया गया नीतिगत फैसला

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद विक्रमशिला सेतु पहुंचकर वहां की मौजूदा स्थिति, चल रहे निर्माण कार्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा की. इस जमीनी समीक्षा के दौरान तकनीकी अधिकारियों ने पुल की ढांचागत स्थिति और सुचारू यातायात व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री को विस्तृत जानकारी दी. इसके बाद आम जनता को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से बेली ब्रिज को सीमित और हल्के वाहनों के लिए खोलने की अंतिम अनुमति दी गई. सरकार का कहना है कि इस फैसले से भागलपुर और आसपास के पड़ोसी जिलों के लोगों को काफी सहूलियत होगी, जिन्हें वैकल्पिक लंबे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था.

🚫 सिर्फ हल्के वाहनों को ही मिलेगी अनुमति, श्रावणी मेला और मानसून को लेकर प्रशासन अलर्ट

राज्य सरकार ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस अस्थायी पुल पर केवल छोटे और हल्के वाहनों (जैसे कार, बाइक और ऑटो) का ही परिचालन हो सकेगा. किसी भी परिस्थिति में भारी कमर्शियल वाहनों या ओवरलोड ट्रकों को पुल पर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी. प्रशासन का मानना है कि यदि भारी वाहनों को अनुमति दी गई, तो इससे बेली ब्रिज की संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. सरकार ने यह निर्णय आगामी विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला और मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए लिया है, क्योंकि इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और खराब मौसम यातायात के लिए बड़ी चुनौती बन जाते हैं.

⏳ सितंबर से नवंबर तक फिर पूरी तरह बंद रहेगा पुल, बदले जाएंगे क्षतिग्रस्त स्लैब

हालांकि, स्थानीय लोगों को मिलने वाली यह राहत सिर्फ कुछ ही महीनों के लिए सीमित होगी. सरकार ने स्पष्ट रोडमैप साझा करते हुए बताया है कि 15 सितंबर से विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की मुख्य मरम्मत और स्थायी ‘ट्रस ब्रिज’ (Truss Bridge) के निर्माण का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा. इसके तहत सबसे पहले पुल के तीन अत्यंत क्षतिग्रस्त स्लैब को अत्याधुनिक कंक्रीट कटिंग तकनीक की मदद से काटकर पूरी तरह हटाया जाएगा. इस मुख्य निर्माण कार्य के शुरू होने के बाद, 15 सितंबर से लेकर नवंबर के आखिरी हफ्ते तक सेतु पर सभी तरह का आवागमन एक बार फिर पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा.

🗓️ 30 नवंबर तक सभी भारी वाहनों के लिए भी पुल को पूरी तरह खोलने का लक्ष्य: मंत्री शैलेंद्र

बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता की सुविधा और सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है. उन्होंने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि 30 नवंबर तक ट्रस ब्रिज निर्माण कार्य को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा और उसके बाद छोटे-बड़े सभी भारी वाहनों के लिए इस मुख्य सेतु को फिर से हमेशा के लिए खोल दिया जाएगा. मंत्री ने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा.

🛡️ सेना जैसी बेली ब्रिज तकनीक का इस्तेमाल, देश के चुनिंदा पुलों में शामिल हुआ विक्रमशिला सेतु

इस बेली ब्रिज के सफल निर्माण के साथ ही विक्रमशिला सेतु अब देश के उन चुनिंदा और विशिष्ट पुलों की सूची में शामिल हो गया है, जहां आपदा प्रबंधन के तहत इस उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है. इससे पहले आमतौर पर इस स्वदेशी और त्वरित तकनीक का उपयोग लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना द्वारा रणनीतिक आवाजाही के लिए किया जाता रहा है. यह तकनीक बेहद कम समय में एक अस्थायी लेकिन अत्यधिक मजबूत और प्रभावी संरचना तैयार करने के लिए दुनिया भर में जानी जाती है. सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि बिहार के अन्य पुराने पुलों की भी तकनीकी समीक्षा की जा रही है ताकि समय रहते उनका रखरखाव किया जा सके.