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Supreme Court Verdict: एसआईआर की संवैधानिक वैधता पर कोर्ट का फैसला; अभिषेक मनु सिंघवी बोले- ‘चुनाव आयोग की खामियों पर नहीं हुई टिप्पणी’

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर (SIR) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोर्ट के फैसले का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि भले ही कोर्ट ने वैधता को मान लिया है, लेकिन इस फैसले ने कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अभी मिलना बाकी है।

🗳️ ‘नागरिकता का निर्णय लेने वाली अंतिम संस्था चुनाव आयोग नहीं’

सिंघवी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकता के विषय में चुनाव आयोग अंतिम संस्था नहीं है। उन्होंने कहा, “जहां नागरिकता का प्रश्न उठता है, वहां चुनाव आयोग को यह मुद्दा गृह मंत्रालय जैसे सक्षम प्राधिकारी को रेफर करना होगा और उनका निर्णय ही बाध्यकारी होगा।” सिंघवी के अनुसार, चुनाव आयोग केवल प्रशासनिक स्तर पर ही इस मामले को देख सकता है।

❓ 7.5 करोड़ लोगों का मताधिकार कैसे छीना गया?

कांग्रेस नेता ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर चुनाव आयोग के पास नागरिकता पर अंतिम निर्णय का अधिकार नहीं था, तो फिर विभिन्न राज्यों में 7.5 करोड़ लोगों को मताधिकार से वंचित क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि बिहार में 65 लाख निष्कासन (डिलीशन) हुए थे, जिनके नाम दोबारा प्रकाशित करने और कारण स्पष्ट करने की प्रक्रिया तभी संभव हो पाई, जब राजनीतिक दलों और एनजीओ ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने जल्दबाजी में खामियों के साथ प्रोग्राम लॉन्च किया था।

📉 कोर्ट की टिप्पणी न होने पर जताया दुख

अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की उन गंभीर खामियों पर कोई टिप्पणी नहीं की, जिनके कारण आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन खामियों में सुधार केवल इसलिए हो सका क्योंकि सिविल सोसायटी, राजनीतिक दलों और एनजीओ ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बताया है।