अमेरिकी अप्रवासियों का एक और ठिकाना सक्रिय हुआ
सिएरा लिओनः अमेरिका से निकाले गये अवैध अप्रवासियों को लेकर पहला विमान पहुंचा है। इसके साथ ही सिएरा लियोन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े आव्रजन (इमिग्रेशन) अभियान के तहत प्रवासियों को निष्कासित करने वाले समझौतों को स्वीकार करने वाला नवीनतम अफ्रीकी देश बन गया है। सिएरा लियोन के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, बुधवार को राजधानी फ्रीटाउन के पास हवाई अड्डे पर पहुंचे इन प्रवासियों में घाना के पांच, गिनी के दो, सेनेगल का एक और नाइजीरिया का एक नागरिक शामिल है।
हवाई अड्डे पर मौजूद स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिकारी डोरिस बाह ने बताया कि ये सभी प्रवासी अमेरिका में हिरासत के दौरान महीनों तक जंजीरों में जकड़े रहने के कारण बेहद सदमे में थे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इनमें से अधिकांश लोग जल्द से जल्द अपने गृह देश वापस लौटना चाहते हैं। डोरिस बाह ने उनके पकड़े जाने की परिस्थितियों पर बात करते हुए कहा, कुछ प्रवासियों को अमेरिका में सड़कों और उनके कार्यस्थलों से गिरफ्तार किया गया था, जबकि एक व्यक्ति को तो फुटबॉल खेलते समय हिरासत में ले लिया गया था। उन्होंने बताया कि इन प्रवासियों को फिलहाल एक होटल में ठहराया जाएगा और उम्मीद है कि वे अधिकतम दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने देशों के लिए रवाना हो जाएंगे।
विदेश मंत्री टिमोथी मूसा कब्बा ने बुधवार को मीडिया को बताया कि सरकार इन प्रवासियों को उनके गृह देशों की आगे की यात्रा से पहले लगभग 90 दिनों तक अपने यहां रखने के लिए सहमत हुई है। इस मानवीय और परिचालन लागत से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए अमेरिकी सरकार से 15 लाख डॉलर का अनुदान मिला है, जो इस समझौते का समर्थन करता है।
अमेरिका ने कम से कम आठ अन्य अफ्रीकी देशों के साथ तीसरे देश में निर्वासन (थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन) के ऐसे समझौते किए हैं। इनमें से कई देश वे हैं जो व्यापार, सहायता और प्रवासन को प्रतिबंधित करने वाली ट्रंप प्रशासन की नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाले अन्य ज्ञात अफ्रीकी देशों में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), इक्वेटोरियल गिनी, दक्षिण सूडान, रवांडा, युगांडा, इस्वातिनी, घाना और कैमरून शामिल हैं। हालांकि, फ्रीटाउन (सिएरा लियोन सरकार) ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस सौदे के बदले उन्हें अमेरिका से कोई अन्य रियायतें मिली हैं या नहीं। दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स वॉच ने अफ्रीकी देशों से इन व्यवस्थाओं को खारिज करने का आग्रह किया है। मानवाधिकार संगठन ने सितंबर में तर्क दिया था कि ये अपारदर्शी समझौते अमेरिकी नीति के उस दृष्टिकोण का हिस्सा हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन करता है।