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भारतीय नौसेना के पूर्व कैप्टन की आय से अधिक संपत्ति

जांच के बाद सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भारतीय नौसेना के एक पूर्व कैप्टन रामिंदर सिंह वाधवा के खिलाफ अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने (आय से अधिक संपत्ति) के आरोप में मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कथित अवैध संपत्ति साल 2010 से 2020 के बीच जुटाई गई थी। मई 2024 में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हुए वाधवा 1 जुलाई 1989 को सब-लेफ्टिनेंट के रूप में नौसेना में शामिल हुए थे और 6 अगस्त 2016 को कैप्टन के पद पर पहुंचे थे, जो सेना के कर्नल रैंक के बराबर होता है।

अपनी सेवा के दौरान वाधवा ने कई बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों में काम किया है। इनमें डायरेक्टरेट ऑफ नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस, हेडक्वार्टर एसएफसी (स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड), नेवल डॉकयार्ड (मुंबई), भेल में डायरेक्टरेट ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस सेल, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और डायरेक्टरेट ऑफ नेवल डिजाइन (सबमरीन डिजाइन ग्रुप) शामिल हैं। सीबीआई ने 15 मई को दर्ज की गई अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि वाधवा भ्रष्टाचार की गतिविधियों में लिप्त थे और उन्होंने बड़े पैमाने पर अचल संपत्तियां खड़ी कीं।

सीबीआई के मुताबिक, जांच के दायरे में शामिल 2010 से 2020 की अवधि के दौरान वाधवा के परिवार की संपत्ति 2.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 6.90 करोड़ रुपये हो गई, जिसमें उनकी अचल संपत्तियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई थी। पूर्व अधिकारी, उनकी पत्नी और दो बेटों की आय और खर्चों का आकलन करने के बाद जांच एजेंसी ने पाया कि करीब 3.18 करोड़ रुपये की संपत्ति का कोई संतोषजनक या कानूनी विवरण नहीं दिया जा सका। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यह मामला दर्ज किया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि वाधवा ने साल 2011 में पंचकुला में खरीदी गई जमीन पर एक फार्महाउस का निर्माण कराया था। सीबीआई की एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि इस फार्महाउस के निर्माण और रखरखाव पर हुए खर्च को अभी इस गणना में शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, जांच अवधि के दौरान खरीदे गए वाहनों (चल संपत्ति) और उनके बच्चों की शिक्षा पर हुए खर्चों को भी अभी अंतिम विवरण में नहीं जोड़ा गया है। केंद्रीय एजेंसी का मानना है कि इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद आय से अधिक संपत्ति का यह कुल आंकड़ा जांच के दौरान और भी बढ़ सकता है।