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Yamunanagar Water Crisis: हथनीकुण्ड बैराज पर गहराया जल संकट, पानी की आवक सिर्फ 2800 क्यूसिक रही

यमुनानगर : यमुनानगर के हथनीकुण्ड बैराज पर जल संकट गहराता जा रहा है। इस समय बैराज पर पानी की आमद ऐतिहासिक रूप से बेहद कम दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, यहां सिर्फ 2800 क्यूसिक पानी रिकॉर्ड किया गया है, जो सामान्य स्तर से काफी नीचे है। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश और वेस्टर्न जमना कैनाल पर पड़ रहा है, जिन्हें उनकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

⚡ बिजली उत्पादन पर पड़ा असर: हाईडल पावर प्रोजेक्ट हुए प्रभावित

जल की कमी का असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। हाईडल पावर प्रोजेक्ट पर भी इसका प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है, जहां पानी की कमी के चलते बिजली उत्पादन बाधित हो गया है। इससे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। अगर पिछले साल की स्थिति से तुलना करें, तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी। मानसून सीजन के दौरान यहां लगभग 3 लाख 29 हजार क्यूसिक पानी दर्ज किया गया था, जो इस साल के वर्तमान स्तर के मुकाबले कई गुना अधिक है।

⛰️ पहाड़ों में बर्फ पिघलने से मामूली राहत, लेकिन संकट अभी बरकरार

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बर्फ पिघलने से रात के समय जलस्तर में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी जरूर हो रही है, लेकिन यह बढ़ोतरी मौजूदा संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। दिन के समय गर्मी और वाष्पीकरण के कारण पानी फिर से कम हो जाता है। कुल मिलाकर, हथनीकुण्ड बैराज पर घटता जलस्तर आने वाले दिनों में कृषि, पेयजल और बिजली तीनों क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

⛈️ मानसून पर टिकी नजरें: जलस्तर बढ़ने का एकमात्र सहारा

लगातार गिरते जलस्तर ने सिंचाई विभाग और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी यमुना नहर से सिंचाई करने वाले किसानों को फसलों के सूखने का डर सताने लगा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब सबकी नजरें मानसून पर टिकी हैं। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है, तो पेयजल और औद्योगिक कार्यों के लिए पानी की कटौती की नौबत आ सकती है। फिलहाल, उपलब्ध पानी को प्राथमिकता के आधार पर वितरित किया जा रहा है।