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Mohan Bhagwat Statement: ‘सेवा कर्तव्य है, उपकार नहीं’, मोहन भागवत बोले— आदिवासियों ने विदेशी आक्रमणों से बचाई देश की आत्मा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भगवत ने शनिवार को कहा कि विदेशी आक्रमणों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की पहचान और आत्मा को संरक्षित रखा.भागवत ने जोर देकर कहा कि इन समुदायों के योगदान को पहचानते हुए उन्हें मुख्यधारा के विकास में पूरी तरह शामिल करना जरूरी है.

दरअसल मोहन भागवत शनिवार को मुंबई में कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य समाज को कुछ वापस देना है. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति समाज की भलाई के लिए काम करता है और खर्च करता है, अहसान के तौर पर नहीं, बल्कि कर्तव्य समझकर.

‘दूसरों की सेवा करने से हमारा अपना विकास होता’

उन्होंने कहा ‘दूसरों की सेवा करने से हमारा अपना विकास होता है. दूसरों को आगे बढ़ने में मदद करके हम स्वयं को बेहतर करते हैं और एक बेहतर इंसान बनते हैं. यही सिद्धांत इस भारतीय भूमि का मूल मूल्य है, जिसे आमतौर पर हिंदू समाज के रूप में जाना जाता है’. उन्होंने कहा ‘यह समाज का वह स्थायी लोकाचार है, जो हजारों से कायम है. कई कारणों से, कुछ हमारी उदासीनता के कारण और कुछ विदेशी आक्रमणों के कारण, इस लोकाचार को संरक्षित रखने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ी’.

‘देश की पहचान और आत्मा को संरक्षित रखा’

RSS प्रमुख ने आगे कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने पाया कि समाज की यह विचारधारा, यह मूल्य प्रणाली ही इसकी आत्मा है और इसे जीवित रखने की कुंजी है. इसलिए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि जो लोग इस आत्मा को संरक्षित करने का प्रयास करेंगे, उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा और उन्हें घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों और कठिनाइयों के बावजूद, आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने देश की पहचान और आत्मा को संरक्षित रखा है.

उन्होंने कहा ‘ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समूहों से संबंधित लोगों में देश की मूल पहचान बरकरार रही’. भागवत ने उन्हें मुख्यधारा की विकास प्रक्रिया में एकीकृत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने की बात कही कि उन्हें सेवाओं और सुविधाओं तक समान पहुंच प्राप्त हो.

‘विश्व को भी समर्थन देना चाहिए…’

वैश्विक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ रहा है और संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक स्थिर शक्ति के रूप में उभर सकता है. उन्होंने कहा कि देश को न केवल अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए बल्कि विश्व को भी समर्थन देना चाहिए. उन्होंने ‘विश्व को यह देखना चाहिए कि देश न केवल अपने दुखों और पीड़ाओं का समाधान कर रहा है बल्कि विश्व को भी इसी तरह के मुद्दों से निपटने में मदद कर रहा है’.

‘समाज की सेवा एक कर्तव्य है’

RSS प्रमुख ने कहा कि समाज की सेवा कोई एहसान नहीं बल्कि एक कर्तव्य है जो व्यक्ति के स्वयं के विकास में योगदान देता है. उन्होंने कहा कि दूसरों को आगे बढ़ने में मदद करना भी व्यक्ति को ऊपर उठाता है और समाज के सामूहिक ताने-बाने को मजबूत करता है. भगवत ने कहा कि तथाकथित शिक्षित और विकसित वर्ग समय के साथ इन समुदायों से दूर होते चले गए हैं. उन्होंने इस खाई को पाटने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक पहचान इन परंपराओं और मूल्यों में निहित है, जिन्हें आदिवासी और दलित समुदायों ने संरक्षित रखा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज अपनी पहचान खो देता है, तो उसका अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है.