दीवारों में चिपकी रहती है पिंक फ्लॉयड मकड़ी
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आकार में छोटी, शिकार में बेजोड़
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गैलापागोस प्रजाति से संबंध
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खोज के लिहाज से नई प्रजाति
राष्ट्रीय खबर
रांचीः दक्षिण अमेरिकी संस्थानों के शोधकर्ताओं ने हाल ही में दरारों में रहने वाली मकड़ी की एक नई प्रजाति की पहचान की है। इस खोज ने वैज्ञानिकों के बीच पिकलिनिया वंश को लेकर समझ और विस्तृत कर दी है। इस नई प्रजाति का नाम पिनलिनिया फ्लोइडमूरारिया रखा गया है, जो संगीत जगत के दिग्गज बैंड पिंक फ्लॉयड को एक अनूठी श्रद्धांजलि है।
नाम का दूसरा हिस्सा मुरारिया लैटिन शब्द मुरस से लिया गया है जिसका अर्थ है दीवार, जो न केवल इस मकड़ी के रहने के स्थान को दर्शाता है, बल्कि बैंड के प्रसिद्ध एल्बम द वॉल की ओर भी इशारा करता है। यह शोध जू सिस्टमैटिक्स एंड इवोल्यूशन जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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पी. फ्लॉयडमुरारिया का शारीरिक आकार मात्र 3 से 4 मिलीमीटर है, लेकिन इसकी शिकार करने की क्षमता इसे एक प्रभावशाली शिकारी बनाती है। शहरी वातावरण में रहने वाली यह मकड़ी घरेलू कीटों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोलंबिया में किए गए शोध के अनुसार, यह मकड़ी मुख्य रूप से चींटियों (हाइमनोप्टेरा), मक्खियों और मच्छरों (डिप्टेरा) के साथ-साथ भृंगों (कोलियोप्टेरा) का शिकार करती है।
वैज्ञानिकों ने आश्चर्यजनक रूप से पाया कि ये नन्ही मकड़ियाँ अपने शरीर (प्रोसोमा) के आकार से छह गुना तक बड़ी चींटियों को पकड़ने में सक्षम हैं। इनकी शिकार तकनीक भी काफी आधुनिक है; ये अक्सर कृत्रिम प्रकाश स्रोतों के पास अपना जाला बुनती हैं ताकि प्रकाश की ओर आकर्षित होने वाले कीटों को आसानी से फंसा सकें।
इस अध्ययन ने गैलापागोस द्वीप समूह की एक संबंधित प्रजाति, पिनलिनिया फासियाटा, पर भी नई रोशनी डाली है। शोधकर्ताओं ने पहली बार इस प्रजाति के मादा जननांगों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। गैलापागोस की मकड़ी और कोलंबिया की इस नई प्रजाति के बीच शारीरिक बनावट में, विशेषकर नर मकड़ी की संरचना में, गहरी समानताएं पाई गई हैं।
विशाल प्रशांत महासागर की दूरी के बावजूद यह समानता वैज्ञानिकों को हैरान करती है। वे अभी इस बात पर शोध कर रहे हैं कि क्या यह समानता किसी साझा पूर्वज के कारण है या समान पर्यावरणीय परिस्थितियों ने इन्हें एक जैसा विकसित किया है।
कोलंबिया में खोजी गई यह पिकलिनिया वंश की अब तक की केवल दूसरी प्रजाति है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके विकासवादी इतिहास और भौगोलिक मूल को समझने के लिए अभी और अधिक डीएनए और आणविक अध्ययन की आवश्यकता है। यह नन्ही मकड़ी भविष्य में शहरी कीट नियंत्रण के एक प्रभावी प्राकृतिक साधन के रूप में पहचानी जा सकती है।
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