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Bihar Water Crisis: बिहार में कहां गायब हो गए 9 हजार तालाब और झीलें? जल गणना की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

देश में पानी की कमी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन पानी की समस्या को दूर करने के मामले में लापरवाही भी खूब बरती जा रही है. बिहार में भी पानी को लेकर समस्या बनी रहती है, लेकिन जल स्रोतों से जुड़ी जनगणना में यह बात सामने आई है कि लापरवाही की वजह राज्य में बड़ी संख्या में जल स्रोत गायब होते जा रहे हैं. यह संख्या एक-दो चार की नहीं है बल्कि करीब 9 हजार जल स्रोतों का कुछ पता नहीं है.

आखिर ये जल स्रोत कहां चले गए? यह सवाल केंद्र की जल निकाय जनगणना (The 2nd Census of Water Bodies, 2023-24) के आने के बाद उठ रहा है, जिससे पता चलता है कि राज्य में करीब 8,940 जल स्रोत गायब हो चुके हैं. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा पिछले साल बिहार, दिल्ली, असम, लद्दाख और सिक्किम के लिए किए गए जल स्रोतों की दूसरी जनगणना से यह पता चलता है कि 2018-19 में बिहार में दर्ज 45,793 जल स्रोतों में से महज 36,856 ही मौजूद हैं, जबकि 9,000 के करीब जल स्रोत गायब होते चले गए.

सरकार की निगरानी में 45 फीसदी जल स्रोत

जनगणना के अनुसार, इन जल स्रोतों में से 45 फीसदी तो बिहार सरकार के स्वामित्व में ही है, हालांकि राज्य के राजस्व और भूमि सुधार विभाग के पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि इनमें से कितने जल स्रोतों पर अतिक्रमण (आंशिक रूप से हो या पूरी तरह से) कर लिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से बताया, “हम जल निकाय जनगणना के नतीजों की समीक्षा कर रहे हैं और अतिक्रमण-मुक्त सार्वजनिक तालाबों पर एक अपडेटेड रिपोर्ट तैयार करेंगे.” इस जनगणना से यह पता चलता है कि 85 फीसदी जल स्रोत ग्रामीण इलाकों में मिलते हैं. इनमें से ज्यादातर करीब 91 फीसदी तालाब हैं, जबकि शेष झीलें, टैंक, जलाशय, चेक डैम और परकोलेशन डैम के रूप में हैं.

राज्य में अब महज 258 झील ही बचे

जनगणना से पता चलता है कि 2018-19 में बिहार में मौजूद 35,027 तालाबों में से अब केवल 33,618 ही बचे हैं. इस तरह से राज्य में 1,409 तालाब पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं. इसी तरह से टैंकों की संख्या में भी कमी आई है. टैंक की संख्या 4,221 से घटकर 859 तक आ गई है तो झीलों की संख्या भी 2,693 से घटकर 258 और जलाशयों की संख्या 2,156 से घटकर 315 रह गई है.

राज्य के जल स्रोतों में से अधिकतर (40.4 प्रतिशत) पंचायतों के स्वामित्व में हैं, इसके बाद राज्य WRD या राज्य सिंचाई विभाग (22.3 प्रतिशत) का स्थान आता है.

अतिक्रमण से हो रहा खासा नुकसान

राज्य के जल से जुड़े सोर्सों पर तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है. और ये खासतौर से भू माफिया की ओर से किया जाता रहा है. इस जगहों पर लगातार अतिक्रमण से नया खतरा उत्पन्न हो रहा है. साल 2023 के एक आदेश में, पटना हाई कोर्ट ने कहा था कि राज्य में 1,045 तालाबों पर अतिक्रमण किया जा चुका है.

इसी तरह बिहार विधानसभा के हाल के बजट सत्र के दौरान सार्वजनिक जल स्रोतों के गायब होने से जुड़े एक सवाल के जवाब में, राज्य के राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने बताया था कि सिर्फ 5 तालाबों पर ही अतिक्रमण किया गया है. जबकि इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) के विधायक IP गुप्ता ने इस दावे का विरोध किया.

गुप्ता ने कहा, “अब जब जल निकायों की ताजा जनगणना ने सरकार के झूठ को बेनकाब कर दिया है, तो हम इस सवाल को फिर से उठाएंगे.”