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छत्तीसगढ़ का सियासी पारा हाई! भूपेश बघेल ने अमित शाह को ललकारा- “हिम्मत है तो नक्सलवाद पर करें खुली बहस।”

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने अमित शाह पर लोकसभा में गलत बयानी और प्रदेश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए खुली बहस की चुनौती दे दी. बघेल ने कहा कि नक्सलवाद पर कांग्रेस सरकार की रणनीति और विकास मॉडल का रिकॉर्ड खुद गवाही देता है.

जिस मंच पर बुलाएंगे, बहस के लिए तैयार हूं- बघेल

रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि आज 31 मार्च है और अमित शाह के कथन के अनुसार यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का आखिरी दिन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकसभा में यह कहना कि कांग्रेस सरकार ने कोई मदद नहीं की, सरासर झूठ है.बघेल ने दो टूक कहा कि अमित शाह जिस मंच, समय और स्थान का चयन करेंगे, वह वहां बहस के लिए उपस्थित रहेंगे. उनका कहना था कि प्रदेश और देश को इस तरह भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए.

कांग्रेस सरकार की रणनीति, विश्वास और विकास- भूपेश बघेल

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दोहरी रणनीति पर काम किया. पहली रणनीति थी बस्तर के आदिवासियों का विश्वास जीतना और दूसरी थी सुरक्षा के साथ विकास कार्यों को आगे बढ़ाना. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने वनाधिकार पट्टे, राशन कार्ड, पीडीएस दुकानें, स्कूल, आंगनबाड़ी और इलाज की सुविधाएं देकर आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ा. जैसे-जैसे नक्सलवाद पीछे हटता गया, वैसे-वैसे गांवों में विकास के काम तेज किए गए, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा.

हर नक्सल मुक्त गांव को 1 करोड़ कब मिलेगा- बघेल

भूपेश बघेल ने अमित शाह से सीधा सवाल किया कि अगर 31 मार्च तक नक्सलवाद समाप्त होने का दावा सही है, तो बस्तर के हर नक्सल मुक्त गांव को 1 करोड़ रुपये देने का वादा कब पूरा होगा.उन्होंने कहा कि यह घोषणा खुद अमित शाह ने की थी, इसलिए अब जनता को इसका जवाब मिलना चाहिए. बघेल ने आरोप लगाया कि लगातार बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई और वादों पर अमल नहीं दिख रहा.

शहीद जवानों के सम्मान का मुद्दा भी उठाया

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नक्सल मोर्चे पर डीआरजी और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नियुक्त जवानों ने अपनी बहादुरी और बलिदान से नक्सलवाद को कमजोर किया.बघेल ने आरोप लगाया कि अमित शाह के बयान इन शहीद जवानों के योगदान को कमतर दिखाते हैं, जो उनके बलिदान का अपमान है.

माफी या बहस, भूपेश की अंतिम चुनौती

अपने बयान के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि अमित शाह को छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिए. यदि वे अपने बयान पर कायम हैं, तो खुली बहस के लिए समय और स्थान तय करें, वह निश्चित रूप से वहां पहुंचेंगे.इस बयान के बाद नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में नया सियासी तूफान उठना तय माना जा रहा है.