Middle East Crisis 2026: हूती, हिजबुल्लाह और ईरान का एक्शन; क्या मिडिल ईस्ट में खुल गया है तीसरा मोर्चा?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है और अब यह धीरे-धीरे एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिख रहा है. हालात तब और गंभीर हो गए जब ईरान समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ के तीन प्रमुख घटक हिजबुल्लाह, हूती विद्रोही और ईरान एक साथ सक्रिय हो गए.
28 मार्च को यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने औपचारिक रूप से युद्ध में प्रवेश किया. उन्होंने इजराइल के दक्षिणी शहर बीयर शेवा क्षेत्र को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से बड़े पैमाने पर हमला किया. हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने चेतावनी दी कि हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक आक्रामकता समाप्त नहीं होती. इस हमले के बाद रेड सी के महत्वपूर्ण शिपिंग रूट पर खतरा फिर मंडराने लगा है.
हिजबुल्लाह का जबरदस्त हमला
हूतियों की एंट्री के तुरंत बाद हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर 24 घंटे के भीतर 100 से ज्यादा हमले किए. इन हमलों में रॉकेट, ड्रोन और मिसाइल शामिल थे. हमलों का निशाना गोलान हाइट्स और हाइफा जैसे क्षेत्र बने. इजराइल की एयर डिफेंस ने कई हमलों को नाकाम किया, लेकिन लगातार हमलों के कारण सायरन बजते रहे और हालात तनावपूर्ण बने रहे.
लेबनान में इजराइल का विस्तार
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा जोन बढ़ाने का आदेश दिया है. इजराइल का लक्ष्य लिटानी नदी तक नियंत्रण स्थापित करना है ताकि हिजबुल्लाह के हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. लेबनान सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की चेतावनी दी है.
खाड़ी देशों पर ईरान के हमले
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमले में रडार सिस्टम और ईंधन टैंक को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में भी बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान का आरोप है कि ये देश अमेरिका को सैन्य सहायता दे रहे हैं, इसलिए वे वैध लक्ष्य हैं.