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समालखा : जन सेवा दल पानीपत ने गांव नरायणा के 24 वर्षीय सचिन छौक्कर को बहादुरी के लिए सम्मानित किया। सचिन ने अपनी जान जोखिम में डालकर दिल्ली पैरलल नहर में डूब रहे एक ही परिवार के पांच सदस्यों की जान बचाई थी। दल के पदाधिकारियों ने उनके घर पहुंचकर शील्ड, शॉल व अन्य भेंट देकर सम्मानित किया।

सचिन ने साहस दिखाते हुए बचाई थी परिवार की जान

जानकारी के अनुसार पानीपत के सौदापुर निवासी दीपक अपनी पत्नी मंजू, बेटियों मानसी व प्रिया और ढाई वर्षीय बेटे प्रियांश के साथ अपनी ससुराल शेखपुरा (गन्नौर) से नहर किनारे के रास्ते गांव लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। इस दौरान सचिन ने साहस दिखाते हुए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस मौके पर जन सेवा दल के प्रधान कृष्ण मनचंदा ने सचिन के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहसिक कदम युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। कार्यक्रम में गांव नरायणा के सरपंच प्रतिनिधि विनोद, अजय छौक्कर, प्रमोद सहित अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे। बता दें कि सचिन छौक्कर गांव नरायणा के निवासी हैं और पानीपत की एक कंपनी में फील्ड मैनेजर के रूप में कार्यरत हैं। वह अपने बड़े भाई विकास के साथ खेती-बाड़ी में भी हाथ बंटाते हैं।

1978 में हुई थी जन सेवा दल की स्थापना

जन सेवा दल के सचिव चमन गुलाटी ने बताया कि संस्था की स्थापना वर्ष 1978 में करनाल में हुई थी और 1980 में इसकी शुरुआत पानीपत में की गई। शुरुआती दौर में दल ने जरूरतमंद मरीजों को चाय व दातून उपलब्ध कराने जैसी छोटी सेवाओं से काम शुरू किया, जो आज बड़े स्तर पर जारी है। वर्ष 1981 में सिविल अस्पताल में मरीजों को भोजन वितरण की सेवा शुरू की गई, जो आज भी जारी है।

इसके बाद 1990 में रक्तदान शिविर और 1991 में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार जैसे कार्य भी शुरू किए गए। इसके अलावा स्वास्थ्य जांच शिविर, भंडारों में सहयोग, संकीर्तन, जरूरतमंदों को राशन वितरण और लावारिस अस्थियों का हरिद्वार में विसर्जन जैसी सेवाएं भी संस्था द्वारा की जाती हैं। वर्तमान में प्रधान कृष्ण मनचंदा, श्यामलाल, कमल गुलाटी, ओमप्रकाश सिंघवानी और अशोक मिगलानी सहित कई पदाधिकारी इस सेवा कार्य से जुड़े हुए हैं।