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Nitish Kumar vs Girdhari Yadav: जेडीयू सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर खतरा, नीतीश कुमार ने लोकसभा स्पीकर को भेजा नोटिस; ये है नाराजगी की असली वजह

बिहार में सत्तारुढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने सांसद की लोकसभा की सदस्यता निरस्त किए जाने की मांग को लेकर स्पीकर को नोटिस दिया है. पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में जनता दल (यूनाइटेड) के नेता दिलेश्वर कामैत ने लोकसभा स्पीकर (ओम बिरला) को एक नोटिस सौंपा है, जिसमें पार्टी के सांसद गिरधारी यादव को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए अयोग्य ठहराने की मांग की गई है.

जेडीयू की ओर से कल मंगलवार को बांका से अपने सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता को निरस्त करने के लिए लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजा गया है. उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने के आरोप हैं. सबूत के तौर पर दस्तावेज भी दिए गए हैं.

बेटा RJD के टिकट पर लड़ा विधानसभा चुनाव

यही नहीं पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में गिरधारी के बेटे विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्होंने बेटे के लिए प्रचार भी किया था. गिरधारी के बारे में कहा जा रहा है कि वह लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी लाइन से अलग चल रहे थे. इससे पहले पिछले साल जुलाई में, जनता दल (यूनाइटेड) ने गिरधारी यादव को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बयान देने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

पार्टी ने तब कहा था कि गिरधारी के बयान उसके आधिकारिक रुख के खिलाफ थे और इस वजह से पार्टी को शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी. यही नहीं उन्होंने एसआईआर को लेकर भी अपना बयान दिया था. पार्टी ने स्पीकर से अनुरोध किया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण उनकी सदस्यता खत्म कर दी जाए. साथ ही EVM विरोधी बयानों पर MP को अयोग्य ठहराने की मांग की गई.

गिरधारी की वजह से पार्टी को हुई शर्मिंदगी

बागी तेवर दिखाने वाले गिरधारी यादव को भेजे गए नोटिस में, पार्टी ने उन्हें याद दिलाया कि JDU ने लगातार चुनाव आयोग और EVMs के इस्तेमाल का समर्थन किया है, चाहे तब जब वह विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ का हिस्सा रही हो या अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ है.

नोटिस में यह कहा गया, “इस संदर्भ में, इतने संवेदनशील मामले पर आपकी सार्वजनिक तौर पर की गई टिप्पणियां, खासतौर से चुनावी साल में न केवल पार्टी को शर्मिंदा करती हैं, बल्कि अनजाने में विपक्ष की ओर से लगाए गए आधारहीन और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों को विश्वसनीयता भी प्रदान करती हैं.” जेडीयू ने गिरधारी के आचरण को “अनुशासनहीनता” करार दिया और जोर देकर कहा कि उनकी टिप्पणियां “इस मामले पर जेडीयू के घोषित रुख के अनुरूप नहीं थीं.”

फिर से JDU के प्रमुख चुन लिए गए नीतीश

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सर्वसम्मति से फिर से JDU के अध्यक्ष चुन लिए गए. नीतीश को कल मंगलवार सर्वसम्मति से जेडीयू का अध्यक्ष चुन लिया गया, क्योंकि इस पद के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने अपना नामांकन दाखिल नहीं किया था.

नीतीश के फिर से चुने जाने की घोषणा राजधानी दिल्ली में JDU नेता अनिल हेगड़े ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के बारे में बताया. अनिल हेगड़े ने कहा, “नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 22 मार्च थी, इसके बाद 23 मार्च को नामांकन की जांच (स्क्रूटनी) की गई, और 24 मार्च की सुबह 11 बजे तक नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि थी. इस दौरान महज एक ही नामांकन दाखिल किया गया था, जो कि वर्तमान अध्यक्ष नीतीश कुमार का था. ऐसे में नीतीश फिर से अध्यक्ष चुन लिए गए.