Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत का 'प्लान बी', LPG सप्लाई से लेकर नागरिकों की सुरक्ष... Purnia News: प्रेमी से झगड़े के बाद युवती ने नदी में लगाई छलांग, देवदूत बनकर आए ई-रिक्शा चालक ने बचा... Crime News: साली से शादी में रोड़ा बनी भाभी, देवर ने कुल्हाड़ी से काटकर उतारा मौत के घाट; आरोपी गिरफ... Meerut Central Market: मेरठ में कोहराम! सेटबैक हटाने के आदेश के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग, घरों पर लगाए... UP-SIR Impact: यूपी में वोटरों की संख्या में ऐतिहासिक बदलाव, कम मतदाताओं वाली सीटों पर भी कम हुए वोट... क्या हाल ही में एक ब्लैक होल में विस्फोट हुआ? Katihar Road Accident: कटिहार में बस और पिकअप की भीषण टक्कर, 10 लोगों की मौत और 25 से ज्यादा घायल; र... बेईमानी का ऐसा हिसाब कि सात जन्मों तक रहेगा यादः मोदी बंगाल के मतदाताओं के मुद्दे पर अब शीर्ष अदालत गंभीर चुनावी चकल्लस में घात प्रतिघात के दौर के बीच शिष्टाचार

ईंधन के लिए रूस के दरवाजे फिर जा पहुंचा भारत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव  से गैस की आपूर्ति बाधित

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने उस समय एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया जब ईरान ने खाड़ी देशों के तेल प्रतिष्ठानों पर अपने हमले तेज कर दिए। यह जवाबी कार्रवाई इज़राइल द्वारा ईरान के पार्स प्राकृतिक गैस रिफाइनरी और बुशहर परमाणु संयंत्र पर किए गए हमलों के बाद हुई है।

इस सैन्य टकराव ने क्षेत्र के अधिकांश देशों में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इस गंभीर स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि देश ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयात स्रोतों में व्यापक विविधता लाने का काम पूरा कर लिया है।

मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में भारत का 70 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के क्षेत्रों से आ रहा है। यह सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल पारगमन बिंदु है, जो अक्सर युद्ध की स्थिति में बाधित हो जाता है। भारत ने अब रूस जैसे अन्य विकल्पों पर अपनी निर्भरता और साझेदारी बढ़ाई है, ताकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव होने पर भी घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो। रूस वर्तमान में भारत के लिए कच्चे तेल के प्रमुख और विश्वसनीय स्रोतों में से एक बनकर उभरा है।

ऊर्जा के अन्य स्रोतों के बारे में बताते हुए शर्मा ने कहा कि भारत अब अपनी एलपीजी की जरूरतों का एक हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका से पूरा कर रहा है। इसके अतिरिक्त, तरल प्राकृतिक गैस के मामले में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भारत के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं के रूप में उभरे हैं। भारत की यह बहुआयामी रणनीति न केवल किसी एक क्षेत्र विशेष पर निर्भरता कम करती है, बल्कि युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में देश की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच भी प्रदान करती है। सरकार की इस सतर्कता से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच भी भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।