Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
यूनियन कार्बाइड की खंडहर दीवारों में अब गूंजेगी न्याय की कहानी! भोपाल गैस मेमोरियल बनाने पर लगी मुहर... भोपाल के कोलार में 'गैस माफिया' पर शिकंजा! 25 अवैध सिलेंडर जब्त, ब्लैक में बेचने की थी बड़ी तैयारी; ... Ladli Behna Yojana Update: मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए 1836 करोड़ रुपये, जानें अगली क... अध्यात्म का महामिलन! बागेश्वर धाम पहुंचे सद्गुरु, धीरेंद्र शास्त्री से की खास मुलाकात; साथ आए 40 देश... भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 'गैंगवार'! घायल के पीछे इमरजेंसी गेट तक पहुंचे हमलावर, सरेआम गोलियां चल... शहडोल के लिए ऐतिहासिक दिन! मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ अपना ब्लड सेंटर, अब MBBS की सीटें भी होंगी डबल;... इंदौर में 'महामुकाबला'! नेहरू स्टेडियम में चौकों-छक्कों की बारिश, संतों के आशीर्वाद और द ग्रेट खली क... Shivpuri Fire News: शिवपुरी में दुकान और गोदाम में लगी आग, फंसे हुए परिवार ने साड़ी के सहारे उतरकर ब... सोनम वांगचुक की हिरासत पर सरकार का बड़ा यू-टर्न! गृह मंत्रालय ने तत्काल रिहाई का दिया आदेश; दिल्ली ब... Jabalpur Police Action: जबलपुर एसपी ने 26 टीआई (TI) को दी एक साथ सजा, जानें पुलिस प्रभारियों पर क्यो...

MP के संतरों ने मंडियों में मचाया धमाल, रिकॉर्ड तोड़ मिल रहे दाम; लेकिन इस एक डर ने छीन ली किसानों की नींद!

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में इस बार संतरे की फसल ने किसानों को कुछ राहत जरूर दी है. पिछले कई वर्षों से बाजार में कम कीमत के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा था, लेकिन इस बार बाजार में संतरे के दाम 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. हालांकि उत्पादन कम होने के कारण किसानों को उतना फायदा नहीं मिल पा रहा, जितनी उम्मीद थी.

आगर मालवा जिले में संतरे की खेती बड़ै पैमाने पर की जाती है. बीते कई वर्षों से किसानों को संतरे का भाव मात्र 25 से 30 रुपये किलो तक ही मिल रहा था, जिससे लागत भी मुश्किल से निकल पाती थी. लेकिन इस बार बाजार में संतरे के दाम बढ़कर 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं.व्यापारियों के अनुसार इस बार बेमौसम बारिश, ज्यादा गर्मी और गर्मी के जल्दी शुरू होने के कारण संतरे की फसल जल्दी पक गई और उत्पादन भी कम हुआ. वहीं रमजान और होली जैसे त्योहारों के कारण बाजार में संतरे की मांग बढ़ गई, जिससे भाव में तेजी देखने को मिल रही है.

मजदूरों ने जताई चिंता

जिले के कई स्थानों पर संतरे की मंडियां लगी हुई हैं, जहां से संतरे देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी भेजे जा रहे हैं. संतरे के सीजन में हर साल महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में मजदूर यहां पहुंचते हैं, जो खेतों से संतरे इकट्ठा कर मंडियों में उनकी ग्रेडिंग और पैकिंग का काम करते हैं. हालांकि इस बार संतरे की फसल जल्दी पकने और सीजन जल्दी खत्म होने के कारण मजदूरों को भी काम कम मिल रहा है, जहां आमतौर पर यह काम करीब तीन महीने तक चलता था, वहीं इस बार मजदूरी का काम करीब डेढ़ महीने में ही सिमट गया है.

कीमतें बढ़ने से किसानों को राहत

कुल मिलाकर इस बार संतरे के बढ़े हुए दामों ने किसानों को कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन कम उत्पादन और जल्दी खत्म हुए सीजन ने फायदा सीमित कर दिया. अब किसानों को उम्मीद है कि आने वाले सीजन में बेहतर उत्पादन के साथ उन्हें और अच्छा मुनाफा मिल सकेगा. जिले के कई स्थानों पर संतरे की मंडियां लगी हुई हैं, जहां से संतरे देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी भेजे जा रहे हैं. संतरे के सीजन में हर साल महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में मजदूर यहां पहुंचते हैं, जो खेतों से संतरे इकट्ठा कर मंडियों में उनकी ग्रेडिंग और पैकिंग का काम करते हैं.