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ब्रह्मांड में सोना बनने का रहस्य खुला

बीस साल से इस परमाणु गुत्थी को सुलझाने में सफलता

  • अंतरिक्ष में ही होता है इसका निर्माण

  • तारों के अवशेषों की टक्कर से बनता है

  • न्यूट्रान तारों की टक्कर का परीक्षण

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दशकों से खगोलविदों और परमाणु भौतिकविदों के सामने एक बड़ा प्रश्न रहा है कि ब्रह्मांड में सोना, प्लैटिनम और यूरेनियम जैसे भारी तत्व आखिर बनते कैसे हैं? हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण शोध के जरिए इस 20 साल पुरानी पहेली को सुलझाने का दावा किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि तारों के अवशेषों के टकराने के दौरान परमाणु स्तर पर क्या घटित होता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि लोहे से भारी तत्व  एक प्रक्रिया के माध्यम से बनते हैं। इस प्रक्रिया में एक परमाणु नाभिक बहुत तेजी से न्यूट्रॉन को सोखता है, इससे पहले कि वह रेडियोधर्मी रूप से क्षय हो सके। यह घटना केवल अत्यधिक ऊर्जावान और न्यूट्रॉन-समृद्ध वातावरण में होती है, जैसे कि दो न्यूट्रॉन सितारों का आपस में टकराना ।

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इस शोध की मुख्य सफलता अस्थिर परमाणु नाभिकों के बीटा-क्षय को समझने में निहित है। पिछले 20 वर्षों से वैज्ञानिक इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि ये भारी नाभिक कितनी तेजी से स्थिर होते हैं। न्यूक्लियर फिजिसिस्ट्स ने अब उन्नत कण त्वरक का उपयोग करके उन दुर्लभ और अल्पकालिक परमाणुओं का अध्ययन किया है जो केवल न्यूट्रॉन स्टार विस्फोट के दौरान बनते हैं। उन्होंने पाया कि इन नाभिकों के क्षय होने की दर उम्मीद से अलग थी, जो सीधे तौर पर ब्रह्मांड में सोने की प्रचुरता को निर्धारित करती है।

जब दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं, तो वे अंतरिक्ष में भारी मात्रा में न्यूट्रॉन छोड़ते हैं। यहाँ यह प्रक्रिया शुरू होती है। नए शोध ने पुष्टि की है कि इन टक्करों के दौरान बनने वाले तत्वों का परमाणु भार और उनकी क्षय दर  बिल्कुल वैसी ही है जैसी हम पृथ्वी पर सोने और अन्य भारी धातुओं के भंडार में देखते हैं। इसका अर्थ है कि आपकी उंगली में मौजूद सोने की अंगूठी अरबों साल पहले हुए किसी विशालकाय अंतरिक्ष विस्फोट का हिस्सा है।

यह खोज न केवल हमें हमारे ग्रह के संसाधनों की उत्पत्ति बताती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि आकाशगंगाओं का विकास कैसे होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस डेटा का उपयोग अब ब्रह्मांडीय मॉडलों को अधिक सटीक बनाने के लिए किया जाएगा, जिससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि बिग बैंग के बाद से पदार्थों का वितरण कैसे हुआ।

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