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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म, फिर भी जनता से ‘वसूली’ क्यों? 2% स्मार्ट ड्यूटी के खेल पर एडवोकेट का बड़ा हमला; रुक सकती है आपकी जेब से कटौती

इंदौर : केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पिछले साल ही बंद कर दिया है लेकिन उस प्रोजेक्ट के नाम पर अब भी आम जनता से 2% की स्टांप ड्यूटी वसूली जा रही है, जिसे लेकर इंदौर में विरोध हो रहा है. हाल ही में यह ममला तब चर्चा में आया जब इंदौर के सीनियर एडवोकेट और पंजीयन विलेख विशेषज्ञ प्रमोद द्विवेदी ने शहर में होने वाली तमाम रजिस्ट्री और एग्रीमेंट आदि में इस तरह की वसूली की स्थिति देखी.

स्मार्ट ड्यूटी शुल्क वसूलने का मामला

आमतौर पर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण प्रदेश भर के लाखों लोग अपने मकान प्लाट या दुकान आदि की रजिस्ट्री करने पर यह शुल्क राज्य सरकार के पंजीयन एवं मुद्रण विभाग को दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि नियमानुसार प्रदेश के जो नगर निगम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के दायरे में थे, उनसे ही यह स्टांप ड्यूटी वसूली जानी थी लेकिन राज्य सरकार ने 17 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 264 नगर पंचायत में होने वाली रजिस्ट्री और एग्रीमेंट आदि में भी यह शुल्क लाखों लोगों से वसूला.

7 शहरों में योजना बंद, फिर भी 2% स्टांप ड्यूटी

सीनियर एडवोकेट ने बताया, ” सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले साल ही केंद्र सरकार ने उन 7 शहरों में यह योजना बंद कर दी जहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत निर्माण कार्य हुए थे, लेकिन इसके बावजूद भी पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग 2% स्टांप ड्यूटी की राशि लगातार अब भी वसूल रहा है, जो प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है. इधर इस मामले की जानकारी ज्ञापन के रूप में प्रदेश में सबसे ज्यादा पंजीयन और मुद्रांक शुल्क वसूलने वाले इंदौर के रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों को दी गई तो वह भी इस वसूली को लेकर असहमत नजर आए, लिहाजा अब पूरे मामले की जानकारी शासन स्तर पर भेजी जा रही है.

इधर इस मामले में कल नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौक से की अगुवाई में रजिस्ट्रार कार्यालय को ज्ञापन सौंप कर इस शुल्क की वसूली बंद करने की मांग की गई है.

महिलाओं को व गरीब बस्तियों में भी छूट नहीं

राज्य सरकार द्वारा सबसे ज्यादा राजस्व वसूली वाले इस सेक्टर में अब उन महिलाओं को भी रजिस्ट्री में 2% की छूट नहीं मिल रही है जो रजिस्ट्री में अपने बच्चे पति अथवा माता-पिता का नाम शामिल कर रही है, ऐसे में महिलाओं के नाम से होने वाली रजिस्ट्री में 2% छूट का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है.