Breaking News in Hindi

हिजबुल्लाह के हथियार नहीं हटे तो समस्या खत्म नहीं होगी

बेरुत पर भीषण इजरायली हवाई हमले

बेरुत: लेबनान की राजधानी बेरुत एक बार फिर भीषण धमाकों से दहल उठी है। मंगलवार को इजरायली सेना ने बेरुत के दक्षिणी उपनगरों पर जोरदार हवाई हमले किए, जबकि जमीनी सेना देश के दक्षिणी हिस्से में और अंदर तक दाखिल हो गई है। युद्ध के इस खतरनाक विस्तार के बीच, एक इजरायली दूत ने स्पष्ट किया है कि संघर्ष को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता लेबनानी उग्रवादी समूह हिजबुल्लाह का निशस्त्रीकरण ही है।

लेबनान पिछले सप्ताह इस मध्य पूर्व युद्ध की आग में बुरी तरह झुलस गया था, जब ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या का बदला लेने के लिए इजरायल पर गोलीबारी शुरू की थी। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान के दक्षिण, पूर्व और बेरुत के उपनगरों में लगातार हवाई हमले किए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में अब तक लगभग 500 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 80 से अधिक बच्चे शामिल हैं।

मंगलवार दोपहर को बेरुत के दक्षिणी इलाकों में हुए धमाकों के बाद पूरे शहर में धुएं के काले गुबार देखे गए। हमलों से दो घंटे पहले ही इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने निवासियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद तीन नए जिलों को खाली करने की भगदड़ मच गई। स्थानीय नगर परिषद के एक सदस्य ने बताया कि परिवार अपनी जान बचाने के लिए बदहवास भाग रहे हैं।

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, इस युद्ध ने अब तक लगभग 7 लाख लोगों को विस्थापित कर दिया है। लेबनान की सामाजिक मामलों की मंत्री हनीन सईद ने मंगलवार को चेतावनी दी कि इस बार विस्थापन का आंकड़ा 2024 के पिछले युद्ध से भी ऊपर जा सकता है, जब 10 लाख से अधिक लोग बेघर हुए थे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस साल वैश्विक और क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति के कारण संसाधनों की भारी कमी है, जिससे विस्थापितों की मदद करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

कूटनीतिक गतिरोध इजरायल का रुख स्पष्ट है कि जब तक हिजबुल्लाह के हथियारों का खतरा बना रहेगा, तब तक उत्तरी इजरायल के नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। दूसरी ओर, लेबनान की कमजोर सरकार इस मानवीय त्रासदी और हिजबुल्लाह के सैन्य प्रभाव के बीच फंसी हुई है। हवाई हमलों की गूँज और मलबे में तब्दील होती इमारतों के बीच, लेबनान का भविष्य और मध्य पूर्व की शांति अब केवल इस सवाल पर टिकी है कि क्या हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने का कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा।