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बड़ी खबर: हरियाणा के छात्रों के लिए बंद हुए ब्रिटेन के दरवाजे? कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज ने लगाई रोक, जानें क्या है असली कारण

चंडीगढ़: यूनाइटेड किंगडम (यूके) के कुछ विश्वविद्यालयों ने हरियाणा और पंजाब के छात्रों के आवेदन स्वीकार करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी कालेज बर्मिंघम की ओर से वहां की सरकार के नये दिशा-निर्देशों के बारे में हरियाणा व पंजाब के अभिभावकों को इस बारे में सचेत किया गया है।

इंटरनल कंप्लायंस रिव्यू (आंतरिक अनुपालन समीक्षा) और इंटरनेशनल स्टूडेंट स्पांसरशिप को लेकर यूके गवर्नमेंट ने अपने विश्वविद्यालयों व कालेजों को नये बदलावों को लागू करने के आदेश दिए हैं। यह दिशा निर्देश क्या हैं और इन्हें क्यों लागू किया जा रहा है, यह तो नहीं बताया जा रहा है, लेकिन इतना स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए यूनिवर्सिटी कालेज बर्मिंघम खास इलाकों और प्रोग्राम पर असर डालने वाली नई पालिसी ला रहा है।

अगले आदेश तक हरियाणा व पंजाब के साथ-साथ बांग्लादेश और पाकिस्तान के विद्यार्थियों के दाखिलों संबंधी आवेदन फार्मों पर भी रोक लगा दी गई है। खासतौर से अंडरग्रेजुएट बिजनेस मैनेजमेंट और पोस्टग्रेजुएट मैनेजमेंट इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई के लिए दाखिले नहीं लिए जाएंगे।

बताया जाता है कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल इनमें बहुत बड़ा कारण है। बहुत से आवेदन पत्रों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल पाया गया है। पढ़ाई की बजाय काम (वर्क परमिट) के लिए आने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उच्च नामांकन के बावजूद छात्रों द्वारा पढ़ाई बीच में छोड़ने या विश्वविद्यालय नहीं पहुंचने की घटनाओं में एकाएक बढ़ोतरी को यूके सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है, जिस कारण नये दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

वीजा रदीकरण की घटनाएं भी सबसे अधिक हरियाणा व पंजाब के युवाओं की हो रही हैं, जिस कारण वह टारगेट पर आ गए हैं। बताया जाता है कि अधिकृत रूप से हरियाणा और पंजाब के विद्यार्थियों को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन कुछ मामलों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के छात्रों के आवेदनों की भी कड़ी जांच की जा रही है।