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India-US Trade Deal: भारत-यूएस ट्रेड डील पर कांग्रेस का हमला, प्रणव झा बोले- किसानों के लिए तबाही है यह समझौता

रांची: एआईसीसी के राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा ने केंद्र सरकार पर अमेरिका से ट्रेड डील कर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया. यह आरोप झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाई गई. इस दौरान प्रणव झा ने कहा कि आज केंद्र की सरकार किसके हाथ में है, नरेंद्र मोदी या डोनाल्ड ट्रंप, यह पता ही नहीं चल रहा है. देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है. देश में जो हो रहा है वह रहस्यमय तरीके से हो रहा है और आम लोगों को कुछ पता नहीं चल रहा है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में किए गए यूएस ट्रेड डील भारत के हित में नहीं बल्कि अमेरिकी हित में की गई डील है. इसमें भारत के लिए नुकसान ही नुकसान है. हैरत की बात यह है कि इसे भाजपा सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है. प्रणव झा ने कहा कि एपस्टीन फाइल्स में मोदी सरकार के मंत्री का नाम आना और अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी पर कसते शिकंजे के दबाव में यह डील संभव हो सका है. सरकार 6 गुना अधिक टैरिफ बढ़ने की खुशी मना रही है.

उन्होंने कहा कि 2025 में अमेरिका को हमारा निर्यात 86 बिलियन डॉलर एवं आयात 46 बिलियन डॉलर का था यानी 40 बिलियन ट्रेड सरप्लस था. अब अमेरिका से 100 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त सामान खरीदना है. इससे सरप्लस ट्रेड अब डेफिसिट ट्रेड में बदल जाएगा. चीन के साथ पहले ही 116 बिलियन का व्यापार घाटा है.

प्रणव झा ने कहा कि कृषि क्षेत्र को भी अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है. ऐसे में यह डील भारतीय किसानों के लिए तबाही का सबब बनने वाला है. अमेरिकी किसानों को 64 लाख रुपए सब्सिडी प्रतिवर्ष मिलती है. जबकि भारतीय किसानों को मुश्किल से 12000 रुपये प्रतिवर्ष की सब्सिडी सरकार देती है. ऐसे में कैसे हमारे किसान अमेरिकी किसानों से मुकाबला कर पाएंगे, यह बड़ा और गंभीर सवाल है. कपास की पैदावार करने वाले किसानों के लिए यह ट्रेड डील तबाही की तरह है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने हमारे टेक्सटाइल और कपड़ों पर 18% और बांग्लादेश पर 0% टैरिफ लगाया है. भारत से एक्सपोर्ट होने वाले कुल कपास का 75% बांग्लादेश खरीदता है. अब यही कपास जीरो प्रतिशत टैरिफ पर बांग्लादेश अमेरिका से खरीदेगा तो इसका सीधा असर, भारत के कपास किसानों पर पड़ेगा.

भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, बावजूद इसके अमेरिका के आदेश पर पुराने दोस्त देश रूस से तेल खरीदना भारत बंद कर देगा, इससे शर्मनाक क्या हो सकता है. अपनी जरूरत का 40% सस्ता तेल भारत अभी रूस से खरीदता था, अब अमेरिकी आदेश पर वेनेजुएला से खरीदेगा और अमेरिका इसकी निगरानी भी करेगा. हम जानना चाहते हैं कि क्या इस डील से पहले राज्यों से व्यापक परामर्श किया गया. क्या संसद में इस समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक की जाएगी. किसानों, छोटे उद्योगों की हितों की रक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं, झारखंड जैसे खनन आधारित राज्यों के लिए क्या विशेष प्रावधान है.

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि इस ट्रेड डील में देश की संप्रभुता स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ किया गया है. मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को भयानक अराजकता में धकेलने वाले समझौते किए हैं. वर्ष 2014 के पहले मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी का 17% तक हुआ करता था जो अब घटकर 12.50 प्रतिशत रह गया है. सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम इंपोर्ट फ्रॉम एब्रॉड बनकर रह जाएगा. इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान रविंद्र सिंह, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुजनी, सोनाल शांति, रियाजुल अंसारी भी उपस्थित थे.