Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
LPG Crisis in India: शिरडी से जम्मू तक गैस की भारी किल्लत, सप्लाई चेन ठप होने से बढ़ी मुसीबत; जानें ... दिल्ली में जनजातीय कला का जलवा! 12 दिनों में बिकीं ₹1.25 करोड़ की कलाकृतियाँ; ट्राइब्स आर्ट फेस्ट का... PM Modi Kolkata Rally: बंगाल में अब 'महाजंगलराज' नहीं चलेगा—PM मोदी; ब्रिगेड ग्राउंड से ममता सरकार क... Nitish Kumar Security Breach: बेगूसराय में सीएम नीतीश की सुरक्षा में चूक, हेलीपैड कैंपस में घुसा सां... मुख्यमंत्री सेहत योजना ने बचाई जान! मोहाली की महिला का हुआ फ्री हार्ट ऑपरेशन; ₹4 लाख का खर्च सरकार न... Israel-Lebanon War: लेबनान पर हमले की तैयारी में इजराइल, हिजबुल्लाह के ठिकानों को खत्म करने का पूरा ... PM Modi in Silchar: असम से पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- पूर्वोत्तर के साथ हुआ सौतेला व्यव... अरब देशों में 'जंग' का साया! सुरक्षित भविष्य के लिए लाखों भारतीयों ने छोड़ीं नौकरियां; सूनी होने लगीं... सोनम वांगचुक आज़ाद! 6 महीने बाद हटा NSA, केंद्र सरकार ने अचानक क्यों बदला अपना फैसला? जानें हिरासत रद... Kolkata Violence: पीएम मोदी की रैली से पहले भारी बवाल, मंत्री शशि पांजा के आवास पर हमला; TMC-BJP कार...

Delhi Zoo Animal Adoption: अब आप भी गोद ले सकते हैं बाघ और हिरण, दिल्ली चिड़ियाघर ने जारी की जानवरों की ‘रेट लिस्ट’

अगर आपको जंगली जानवरों से लगाव या प्यार है और उन्हें पालने की चाहत रखते हैं, तो आपका यह अरमान जल्दी ही पूरा हो सकता है. दिल्ली का चिड़ियाघर एक हद तक इसमें आपकी मदद कर सकता है. दरअसल, चिड़ियाघर मार्च से आम लोगों के लिए जानवरों को गोद लेने की सुविधा शुरू करने जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक नेशनल जूलॉजिकल पार्क लोगों को उनके जन्मदिन, शादी की सालगिरह और दूसरे खास मौकों पर एक दिन के लिए जानवर गोद लेने की सुविधा देगा.

अब आपके मन में सवाल होगा कि कैसे और क्या इसके लिए किसी तरह का भुगतान भी करना होगा? तो इसका जवाब है- जी हां, इसके लिए आपको एक तय राशि का भुगतान करना होगा, जो जानवर के आकार और आहार के मुताबिक तय की गई है. जानकारी के मुताबिक हिरण जैसे छोटे जानवर के लिए यह रकम 500 रुपये और बाघ जैसे बड़े जानवर के लिए 50 हजार रुपये तक तय की गई है.

प्रस्ताव को इस महीने मंजूरी

चिड़ियाघर से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कम समय के लिए जानवरों को गोद लेने के प्रस्ताव को इस महीने के आखिर तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है और इसे मार्च में लागू कर दिया जाएगा. एक दिन के लिए गोद लेने की कीमत हर जानवर की सालाना गोद लेने की दर के आधार पर तय की गई है.

मसलन, अगर किसी जानवर का सालाना गोद लेने का चार्ज 50 हजार है, तो उसे एक दिन के लिए अडॉप्ट करने का शुल्क तकरीबन 500 रुपये होगा.

किस जानवर के लिए कितना खर्च?

जानकारी के मुताबिक एक चित्तीदार हिरण, जिसकी सालाना गोद लेने की लागत 18,000 रुपये है, उसे एक दिन के लिए 500 रुपये में गोद लिया जा सकता है. एक स्लॉथ बेयर, जिसकी सालाना गोद लेने की कीमत 45,000 रुपये है, उसे भी 500 रुपये में पूरे दिन के लिए गोद लिया जा सकेगा. एक बाघ के लिए सालाना गोद लेने की कीमत 6 लाख रुपये है और उसके एक दिन के गोद लेने की कीमत लगभग 50,000 रुपये होगी.

चिड़ियाघर इस स्कीम को और आसान बनाने के लिए शॉर्ट-टर्म और ऑनलाइन गोद लेने के विकल्प ला रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो पूरे एक साल के लिए किसी जानवर को गोद लेने का वादा नहीं कर सकते.

क्या होगा फायदा?

उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से ज्यादा लोग हिस्सा लेंगे और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के साथ लोगों की भागीदारी मजबूत होगी. चिड़ियाघर में विजिटर की संख्या बढ़ाने और ज्यादा राजस्व कमाने में भी मदद मिलेगी.

इस स्कीम के तहत गोद लेने वाले चिड़ियाघर द्वारा तय किए गए खर्च उठाएंगे, जिसका इस्तेमाल जानवर के खाने और रोजाना की देखभाल के लिए किया जाएगा. इतना ही नहीं, चुने गए पैकेज के आधार पर गोद लेने वालों को यादगार के तौर पर सर्टिफिकेट और तस्वीरें भी मिलेंगी.

लगेगी डिजिटल स्क्रीन

स्कीम को लोगों तक पहुंचाने के लिए चिड़ियाघर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक डिजिटल स्क्रीन लगाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसमें गोद लेने के विकल्प और सुविधा में रखे गए जानवरों के बारे में जानकारी दिखाई जाएगी.

आपको बता दें कि 2022 में शुरू किए गए एनिमल एडॉप्शन प्रोग्राम का मकसद एनिमल कंजर्वेशन को बढ़ावा देना और वाइल्डलाइफ के साथ लोगों का जुड़ाव मजबूत करना था. हालांकि, अभी चिड़ियाघर एक या दो साल के लिए गोद लेने की इजाजत देता है, जिसमें ज्यादातर गोद लेने वाले कॉरपोरेशन होते थे.

मौजूदा गोद लेने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल थी, जिसके चलते भागीदारी में गिरावट देखी गई. अब तक सिर्फ चार कंपनियां ही आगे आई हैं. इसलिए ज्यादा लोगों को आकर्षित करने के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके.