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Haryana News: हरियाणा के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द कम होंगे बिजली के दाम, सीएम ने दी मंजूरी

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा प्रोत्साहन को स्वीकृति दी है। इस योजना के तहत 31 मार्च 2027 तक 2.22 लाख घरों पर की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना से सस्ती बिजली मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोलर ऊर्जा से संबंधित ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप सोलर (आरटीएस) प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का शुभारंभ किया था।

अब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को प्रदेश में लागू करते हुए वित्तीय सहायता के लिए स्वीकृति दे दी है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (यूएचबीवीएन) के अनुसार इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए तीन श्रेणियां तैयार की हैं।

पहली और दूसरी श्रेणी में शामिल उपभोक्ताओं को ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता के रूप में 19,500 रुपये प्रति किलोवाट की राशि मिलेगी। इस योजना में अधिकतम 97500 रुपये केवल 5 किलोवाट की आरटीएस क्षमता तक के लिए दी जाएगी। सहायता राशि को विद्युत बिलों के माध्यम से 24 मासिक या 12 दो मासिक किस्तों में बगैर किसी ब्याज के लिया जाएगा। जिन परिवारों की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये यानी जो अंत्योदय परिवार हैं उनकी वार्षिक खपत 2400 यूनिट से यदि कम है तो उन्हें 2 किलोवॉट तक की आरटीएस क्षमता स्थापित करने के लिए 25000 रुपये प्रति किलोवाट या वास्तविक लागत का 40 प्रतिशत जो भी कम हो सहायता राशि दी जाएगी।

मगर ऐसे उपभोक्ताओं पर कोई बकाया राशि न हो। जिन परिवारों की वार्षिक आय 1.80 लाख से 3 लाख रुपये तक है उन्हें 2 किलोवाट तक सहायता मिलेगी। आरटीएस स्थापित करने के लिए 10 हजार रुपये प्रति किलोवाट तक वित्तीय पहली श्रेणी में गैर बकाएदार उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है। जिन बिजली उपभोक्ताओं ने 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2025 तक सभी बिजली बिलों का भुगतान कर दिया है उन्हें योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत दूसरी श्रेणी में राज्य सरकार के निगम, बोर्ड, कार्पोरेशन के कर्मचारी शामिल किए गए हैं। एचकेआरएन (हरियाणा कौशल रोजगार निगम) के तहत जिन कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित है उन्हें भी योजना का लाभ उठाने का मौका मिलेगा। योजना का लाभ उठाने के लिए यही शर्त है कि कोई बकाया बिजली बिल नहीं होना चाहिए। इस श्रेणी में शामिल कर्मचारियों को उपभोक्ता खाता संख्या का ब्योरा दर्ज कराना होगा।