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यूपी में ‘गुमशुदगी’ का पहाड़: हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को लगाई फटकार, पूछा- कहाँ गए 1.08 लाख लोग?

उत्तर प्रदेश में लोग लगातार लापता हो रहे हैं और इसको लेकर शिकायतें भी जाती रही है, लेकिन इस तरह के मामलों में पुलिस ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाती. शायद यही वजह है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कल बुधवार को उत्तर प्रदेश में तेजी से लगातार बढ़ रही लापता लोगों की संख्या को लेकर खुद संज्ञान लिया और एक PIL दर्ज की, जिसमें कहा गया कि पिछले 2 सालों में 1.08 लाख से अधिक लोग लापता हो गए, जबकि पुलिस ने महज करीब 9,700 मामलों में ही कार्रवाई शुरू की.

पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए, हाईकोर्ट ने इन आंकड़ों को “चौंकाने वाला” करार दिया. बेंच ने कल बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा, “हम लापता लोगों से संबंधित शिकायतों पर अधिकारियों के रवैये के प्रति बहुत हैरान हैं, क्योंकि इस तरह के मामलों में जाहिर तौर पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है.” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले को आज गुरुवार को भी सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए.

लापता 1 लाख लोग, 9700 पर एक्शन

जस्टिस अब्दुल मोइन और बबीता रानी की डिवीजन बेंच ने ये टिप्पणी विक्रमा प्रसाद की ओर दाखिल एक क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था और पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है. सुनवाई के दौरान बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से मामले में एक विस्तृत हलफनामा मांगा.

सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, 1 जनवरी, 2024 और 18 जनवरी, 2026 के बीच राज्य में करीब 1,08,300 लापता लोगों की शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन लापता लोगों की तलाश करने को लेकर महज 9,700 मामलों में ही कार्रवाई की गई. जबकि अन्य मामलों में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी.

HC ने रजिस्ट्री को दिया PIL का निर्देश

इन आंकड़ों पर ध्यान देते हुए, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस के “सुस्त रवैये” पर नाराजगी जताई और इस मामले को व्यापक जनहित से जुड़ा मानते हुए, कोर्ट रजिस्ट्री को इस मामले को In re: Missing Persons in the State नाम से एक PIL के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया. साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले को गुरुवार (5 फरवरी) को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए.