नये वैज्ञानिक मॉडल के जरिए शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया
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ऑक्सीजन की मात्रा और ग्रहों का निर्माण
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सूर्य के मुकाबले डेढ़ गुणा अधिक ऑक्सीजन
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तूफान, बादल और रासायनिक सुराग पर शोध
राष्ट्रीय खबर
रांचीः बृहस्पति की सतह पर ऊंचे और विशाल बादलों की लहरें किसी नाटकीय पैटर्न की तरह दिखाई देती हैं। पृथ्वी के बादलों की तरह इनमें भी पानी है, लेकिन बृहस्पति पर ये कहीं अधिक घने और गहरे हैं। ये परतें इतनी मोटी हैं कि आज तक कोई भी अंतरिक्ष यान सीधे तौर पर यह नहीं देख पाया है कि उनके नीचे क्या है।
अब, वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (जेपीएळ) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन ने बृहस्पति के वायुमंडल का अब तक का सबसे विस्तृत मॉडल तैयार किया है। यह कार्य ग्रह की गहराई में जाए बिना उसके आंतरिक भाग को समझने का एक नया जरिया प्रदान करता है।
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इस अध्ययन का एक मुख्य निष्कर्ष बृहस्पति की संरचना के बारे में लंबे समय से चली आ रही बहस को सुलझाने में मदद करता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस गैस दानव में सूर्य की तुलना में लगभग डेढ़ गुना अधिक ऑक्सीजन है। यह परिणाम वैज्ञानिकों की उस समझ को और पुख्ता करता है कि बृहस्पति और सौर मंडल के बाकी हिस्सों ने कैसे आकार लिया।
शिकागो विश्वविद्यालय की पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता और मुख्य लेखिका जीह्युन यांग ने कहा, यह ग्रहीय अध्ययन में एक पुराना विवाद रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे आधुनिक कंप्यूटिंग मॉडल अन्य ग्रहों के बारे में हमारी समझ को बदल सकते हैं।
खगोलशास्त्री सदियों से बृहस्पति के अशांत वायुमंडल पर नजर रख रहे हैं। 360 साल पहले शुरुआती दूरबीन अवलोकनों ने ग्रह की सतह पर एक विशाल और स्थायी आकृति का खुलासा किया था, जिसे अब ग्रेट रेड स्पॉट के रूप में जाना जाता है—एक ऐसा विशाल तूफान जो पृथ्वी के आकार से लगभग दोगुना है और सैकड़ों वर्षों से चल रहा है। बृहस्पति के बादलों की सघनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2003 में नासा का गैलीलियो अंतरिक्ष यान इसके वायुमंडल में प्रवेश करते ही पृथ्वी से संपर्क खो बैठा था। वर्तमान में, नासा का जूनो मिशन सुरक्षित दूरी से इसका अध्ययन कर रहा है।
यांग और उनके सहयोगियों ने पहली बार वायुमंडलीय रसायन विज्ञान और हाइड्रोडायनामिक्स को एक ही मॉडल में जोड़ा है। यह मॉडल न केवल रासायनिक प्रतिक्रियाओं बल्कि गैसों, बादलों और बूंदों की गति को भी ट्रैक करता है। शोध से यह भी पता चला है कि बृहस्पति के वायुमंडल में गैसों का ऊर्ध्वाधर संचलन पूर्व मान्यताओं की तुलना में 35 से 40 गुना धीमी गति से होता है। यह खोज न केवल बृहस्पति के अतीत को स्पष्ट करती है, बल्कि वैज्ञानिकों को यह अनुमान लगाने में भी मदद करती है कि अन्य तारों के चारों ओर किस तरह के ग्रह बन सकते हैं और क्या वे जीवन का समर्थन कर सकते हैं।
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