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Chandigarh Mayor Election: क्या BJP को रोक पाएंगे AAP और कांग्रेस? अलग-अलग चुनाव लड़ने से बढ़ा रोमांच

चंडीगढ़ में आज गुरुवार को खासी हलचल रहने वाली है. चंडीगढ़ नगर निगम के नए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए आज चुनाव कराए जाएंगे. चुनाव को लेकर सभी की नजरें लगी हुई हैं. मेयर चुनाव के लिए नगर निगम के 35 पार्षद और चंडीगढ़ के सांसद वोट डालेंगे. इस बार सीक्रेट बैलेट पेपर की जगह ओपन वोटिंग कराई जाएगी, जिसमें पार्षद अपनी सीट से हाथ खड़ा करके अपना वोट डालेंगे.

मेयर चुनाव को लेकर तीनों ही प्रमुख दलों आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं. नंबर गेम में बीजेपी आगे है क्योंकि निगम में उसके पास 18 पार्षद हैं. जबकि नंबर नहीं होने के बाद भी AAP और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं.

BJP के अलावा AAP-कांग्रेस के कितने पार्षद

दूसरे नंबर पर AAP है जिसके पास 11 पार्षद हैं तो कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं. इसके अलावा कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का भी एक वोट है. सदन में कुल 35 पार्षद हैं जबकि एक वोट चंडीगढ़ सांसद के द्वारा भी डाला जाता है यानी कुल वोटों की संख्या 36 तक हो जाती है.

दोनों ही पार्टियां (AAP और कांग्रेस) बीजेपी को रोकने के लिए अभी भी एक-दूसरे को साथ आने की नसीहत दे रही है. हालांकि दोनों ही दलों की और से किसी तरह के गठबंधन करने या एक साथ चुनाव में जाने की कोई संभावना नहीं दिख रही, क्योंकि इन दलों ने पहले ही इस संभावना को खारिज की जा चुकी है. फिर भी संभावना तलाशी जा रही है.

चुनाव से पहले पार्षदों को टूटने का डर

खास बात यह है कि आम आदमी पार्टी के साथ ही बीजेपी को भी अपने पार्षदों के टूटने का डर सता रहा है. यही वजह है कि वोटिंग से पहले AAP के पार्षद पंजाब के रोपड़ तो बीजेपी के सभी पार्षद हरियाणा के मोरनी हिल्स के रिजॉर्ट में भेजे दिए गए थे.

क्या ऐन मौके पर वोटिंग से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी साथ आ सकती हैं. क्या दोनों दलों में किसी तरह का सिक्रेट अलाइंस या गुप्त करार हो गया है. हालांकि इस पूरे सस्पेंस पर चुनाव के दौरान ही पर्दा हट सकेगा.

क्या चुनाव में होगी क्रॉस वोटिंग

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्रॉस वोटिंग करने के लिए कोई भी पार्षद खुलकर अपनी पार्टी के खिलाफ सामने आएगा या नहीं. हालांकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को अभी भी उम्मीद है कि ऐन मौके पर उन्हें एक-दूसरे का साथ मिलेगा और बीजेपी को रोकने के लिए दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार अपने नॉमिनेशन वापस लेकर एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं. हालांकि सीधे तौर पर कोई भी ये बात मानने को तैयार नहीं है लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या कहीं ऐन मौके पर दोनों ही पार्टियों के बीच कुछ सीक्रेट अलाइंस नहीं हो जाएगा जहां एक-दूसरे की उम्मीदवारों को दोनों पार्टियों के पार्षद समर्थन दे सकते हैं.

नगर निगम में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है और अगर किसी भी स्थिति में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षद एक-दूसरे के साथ ना आने के अपने ऐलान पर अडिग रहते हैं, तो ऐसे में बीजेपी का मेयर बनना तय माना जा रहा है.

AAP-कांग्रेस साथ आए तो क्या होगा टाई

अगर चुनाव के दौरान कोई ऐसी स्थिति बनती है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ आ जाते हैं तो AAP के 11 पार्षद कांग्रेस के 6 पार्षद और एक कांग्रेस सांसद का वोट मिलाकर कुल 18 वोट हो जाएंगे जबकि बीजेपी के पास भी 18 ही वोट हैं ऐसी स्थिति में अगले मेयर का चुनाव पर्ची के द्वारा होगा. यानी एक बॉक्स में दोनों ही उम्मीदवारों के नाम की पर्ची डाली जाएगी और फिर ड्रा के जरिए एक पर्ची को बाहर निकाला जाएगा.

हालांकि ये स्थिति तभी बनेगी जब ऐन मौके पर वोटिंग से पहले AAP और कांग्रेस एक साथ आ जाएं और उनके पार्षदों की संख्या सांसद के वोट को मिलाकर 18 पहुंच जाए ऐसे में ही ये लकी ड्रा होगा नहीं तो बीजेपी जीत जाएगी.

कांग्रेस के मेयर उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि वो किसी भी हाल में अपना नाम वापस नहीं लेंगे लेकिन उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी को रोकने के लिए आम आदमी पार्टी के पार्षद ऐन मौके पर अपना हाथ उनके समर्थन में उठाएंगे. दो बार आम आदमी पार्टी का मेयर बनाने के लिए कांग्रेस ने उनका समर्थन किया एक बार तो उनका मेयर बना भी जबकि दूसरे चुनाव में उनके ही पार्षदों ने पार्टी के साथ आत्मघात कर दिया और सीक्रेट वोटिंग के दौरान अपने ही पार्टी को आघात पहुंचाया. ऐसे में अब बारी AAP की है और उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवारों का तीनों ही पदों पर समर्थन करना चाहिए.

इसी तरह AAP के चंडीगढ़ के सह-प्रभारी डॉक्टर एसएस अहलूवालिया ने कहा कि चुनाव के दिन क्या होगा या नहीं होगा. लेकिन हर पार्टी अपनी जीत के लिए प्रयास करती है. हम लगातार कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन किसी का साथ मिलेगा या नहीं ये तो चुनाव के दिन ही पता चलेगा.