प्रयागराज की तनातनी अब राजधानी लखनऊ तक पहुंची
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अविमुक्तेश्वरानंद पर अलग अलग राय
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योगी ने परोक्ष तौर पर कालनेमी कहा
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डिप्टी सीएम ने कहा भगवान हैं वह
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः इलाहाबाद के माघ मेले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य के धरने को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच का मनमुटाव एक बार फिर सतह पर आ गया है।
विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई, जब मेला प्रशासन ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अपनी पालकी से उतरने और मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के लिए बिना अनुयायियों के पैदल संगम की ओर जाने को कहा। तब से शंकराचार्य संगम क्षेत्र के त्रिवेणी मार्ग पर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने शुक्रवार को बसंत पंचमी पर भी स्नान नहीं किया और स्पष्ट किया कि वह मेला प्रशासन द्वारा माफी मांगे जाने के बाद ही गंगा में डुबकी लगाएंगे।
इस गतिरोध के बीच, मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषि राज ने एक सुप्रीम कोर्ट मामले का हवाला देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके शंकराचार्य की उपाधि उपयोग करने के अधिकार पर ही सवाल उठा दिया। हालाँकि, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शुक्रवार रात उन्हें भगवान शंकराचार्य कहकर संबोधित किया।
मौर्य ने संवाददाताओं से कहा, मैं श्रद्धेय शंकराचार्य के चरणों में सिर झुकाता हूँ और उनसे पवित्र स्नान करने की प्रार्थना करता हूँ। उनके साथ जिसने भी दुर्व्यवहार किया है, उसे जांच के बाद दंडित किया जाएगा। हमारी संस्कृति संतों के साथ दुर्व्यवहार की नहीं है।सूत्रों का दावा है कि मौर्य ने भाजपा नेताओं से यहाँ तक कह दिया कि शंकराचार्य के साथ दुर्व्यवहार करने वाले लोग पार्टी की परंपरा और संस्कृति में विश्वास नहीं रखते।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिन पहले हरियाणा के सोनीपत में एक बैठक में कहा था: एक संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। सनातन धर्म को कमजोर करने वाले कई कालनेमि (रामायण का एक राक्षस) हो सकते हैं। उनके इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के अप्रत्यक्ष संदर्भ के रूप में देखा गया।
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के कड़े आलोचक रहे अविमुक्तेश्वरानंद, जिन्हें इस विवाद में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का समर्थन मिला है, ने अपनी बात पर अड़े रहते हुए योगी आदित्यनाथ को कालनेमि का नाम उजागर करने की चुनौती दी। उन्होंने यहाँ तक कह दिया, आदित्यनाथ को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह हर मोर्चे पर विफल रहे हैं। केशव मौर्य को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि भाजपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव मौर्य के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए लड़ा था। जिस दिन मुख्यमंत्री पद के लिए आदित्यनाथ के नाम की घोषणा हुई थी, उसी दिन मौर्य बीमार पड़ गए थे और उन्हें एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था।