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गांवों के लिए बड़ा ऐलान! अब 100 नहीं बल्कि 125 दिन की मजदूरी की गारंटी, दिल्ली नहीं सीधे गांव से होगा विकास कार्यों का फैसला

शिवपुरी: देश दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ की जगह लाये गए नए ‘जी राम जी’ कानून के तहत अब ग्राम विकास की योजनाएं दिल्ली में बैठकर नहीं बल्कि गांव में बैठकर जरूरत के हिसाब से बनाई जाएंगी. यह बात रविवार की देर शाम प्रदेश के ऊर्जा और जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जी राम जी कानून को लेकर की गई प्रेस वार्ता में कही. उनका कहना था कि, ”अब गांव में कानून के तहत साल भर में 100 दिन की जगह सवा सौ दिन की मजदूरी अनिवार्य रूप से दी जाएगी. इसके अलावा एक हफ्ते के भीतर मजदूरी देना अनिवार्य होगा.

15 दिन के भीतर भुगतान
प्रभारी मंत्री की मानें तो, मजदूरी देने में देरी करने वालों को इसकी कीमत भी चुकानी हाेगी. उनके अनुसार, अगर 15 दिन के भीतर भुगतान नहीं हुआ तो मजदूरों को 0.05 प्रतिशत की दर से ब्याज के रूप में अतिरिक्त मजदूरी दी जाएगी. प्रभारी मंत्री के अनुसार, विकसित भारत जी राम जी एक्ट, 2025 के तहत गांव की जरूरत का कोई भी काम कराए जाने का फैसला अब ग्राम सभा द्वारा ही लिए जा सकेंगे. अब गांव की जरुरतों के अनुसार काम होगा, यही इस योजना की आत्मा है.

33 प्रतिशत काम महिलाओं को देना अनिवार्य
इस एक्ट के लागू होने से गांव में जल संरक्षण, इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम, आजीविका मूलक गतिविधियों तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव आदि के काम किए जा सकेंगे. भारत सरकार ‘जी राम जी’ कानून के जरिये ग्रामीण महिलाओं को सशक्त भी बना चाहती है. ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, इस योजना में एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत काम महिलाओं को देना अनिवार्य किया गया है. इसके लिए मजदूरी के साथ-साथ अन्य कार्यों में भी उनके लिए पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए गए हैं और जिससे ग्राम पंचायत का विकास भी संभव हो सकेगा.

इसके अलावा जिन लोगों को मजदूरी नहीं मिलेगी उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव, जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव, जनपद अध्यक्ष हेमलता रघुवीर रावत, नपा अध्यक्ष गायत्री शर्मा, भाजपा महामंत्री योगेंद्र रघुवंशी,केपी परमार, लवलेश जैन चीनू, भाजपा उपाध्यक्ष हेमंत ओझा, नवाब सिंह गुर्जर, इंजी. गोपाल द्ददा उपस्थित थे.

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
प्रभारी मंत्री ने कहा, ”अब रोजगार गारंटी के काम में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.” उनके अनुसार, ”अब तक पंचायत सचिव फोटो के आधार पर मजदूरों की हाजिरी लगाते थे. ऐसे में फर्जी हाजिरी भरकर भी भुगतान निकाल लिया जाता था. परंतु अब नए कानून के अंतर्गत हाजिरी मजदूर के अंगूठे से लगेगी, ऐसे में भ्रष्टाचार करना संभव नहीं होगा.”

स्मार्ट मीटर का खर्चा उपभोक्ताओ से वसूला जाएगा
स्मार्ट मीटर मामले से जुड़े सवाल पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह ने बताया, ”घरों पर लगाये जा रहे स्मार्ट मीटर का खर्चा भी उपभोक्ताओ से वसूला जाएगा.” पूर्व में मंत्री सहित बिजली कम्पनी स्मार्ट मीटर को निशुल्क लगाए जाने की जानकारी देते रहे हैं. वहीं, प्रदेश में इस साल 10% बिजली दर बढ़ोतरी किये जाने के प्रस्ताव से जुड़े सवाल पर मंत्री जी चुप्पी साध गए. जानकारी के अनुसार, स्मार्ट मीटर लगाए जाने पर बिजली कम्पनी पर लगभग 750 करोड़ का खर्च आना बताया जा रहा है. जिसकी भरपाई का भार उपभोक्ता पर आना है.