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JioMart Quick Commerce: रिलायंस ने लॉन्च की सुपरफास्ट डिलीवरी सर्विस, अंबानी के नए दांव से Blinkit, Zepto और Swiggy की बढ़ी टेंशन

आजकल हम सभी की आदत बदल गई है. दूध का पैकेट हो या स्नैक्स, हम दुकान पर जाने के बजाय फोन उठाकर 10 मिनट में डिलीवरी देने वाले ऐप्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी जल्दी सामान पहुंचाने की होड़ में ये कंपनियां पैसा कैसे कमाती हैं? सच तो यह है कि क्विक कॉमर्स के बाजार में मुनाफे तक पहुंचना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अब जो दावा किया है, उसने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं. रिलायंस ने साफ कर दिया है कि उसका क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी (FMCG) बिजनेस अब पैसा कमाने लगा है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि उनका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब हर ऑर्डर पर मुनाफा कमा रहा है, जिसे कारोबारी भाषा में ‘कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव’ होना कहते हैं.

मुनाफे का गणित समझ लें

अक्टूबर 2024 में रिलायंस ने अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की थी. इतने कम समय में कंपनी ने वो हासिल कर लिया है, जिसके लिए दूसरी कंपनियां सालों से संघर्ष कर रही हैं. कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उनका एफएमसीजी कारोबार, जिसे शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, वह भी अब मुनाफे (Ebitda Positive) की स्थिति में आ गया है.

रिलायंस रिटेल के सीएफओ दिनेश तलुजा ने इसके पीछे की वजह समझाई है. दरअसल, रिलायंस भारत में किराना और ग्रोसरी का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. इस वजह से वे एफएमसीजी कंपनियों से सबसे ज्यादा सामान खरीदते हैं. जब आप थोक में इतना बड़ा ऑर्डर देते हैं, तो स्वाभाविक है कि आपको सामान सस्ती दरों पर मिलता है. इसी ‘सोर्सिंग पावर’ का फायदा रिलायंस को क्विक कॉमर्स में मिल रहा है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ रहा है.

खाने-पीने की चीजों से हो रही असली कमाई

रिलायंस की इस सफलता के पीछे एक और बड़ा कारण है ग्राहकों की पसंद को समझना. तलुजा ने बताया कि फूड और बेवरेज (F&B) कैटेगरी में सबसे ज्यादा मार्जिन होता है. रिलायंस के क्विक कॉमर्स पर आने वाले हर तीन में से एक ऑर्डर इसी कैटेगरी का होता है.

आमतौर पर किराना दुकानों में खाने-पीने की चीजों की बर्बादी (वेस्टेज) 30 से 35 प्रतिशत तक होती है, जिससे मुनाफा घट जाता है. लेकिन रिलायंस ने अपने सप्लाई चेन मैनेजमेंट से इस बर्बादी पर लगाम लगा दी है. यही कारण है कि वे ग्राहकों को अच्छी कीमत भी दे पा रहे हैं और खुद भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही, कंपनी अब सिर्फ राशन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन के सामान भी डिलीवर कर रही है, जिससे कमाई का दायरा बढ़ रहा है.

दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले कहां खड़ी है रिलायंस?

रिलायंस के पास करीब 3,000 आउटलेट्स हैं जो क्विक कॉमर्स से जुड़े हैं, जिनमें से 800 डार्क स्टोर्स (जहां से सिर्फ डिलीवरी होती है) हैं. कंपनी का कहना है कि वे अपने पहले से मौजूद स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत कम आती है. आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2025 की तिमाही में रिलायंस को हर दिन 16 लाख (1.6 मिलियन) ऑर्डर मिल रहे थे. ऑर्डर्स की संख्या में तिमाही दर तिमाही 53% की बढ़ोतरी देखी गई है. कंपनी का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स खिलाड़ी बनना है.

फिलहाल इस रेस के सबसे बड़े खिलाड़ी ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी (Swiggy) अभी भी कुल मिलाकर घाटे में ही चल रहे हैं. ब्लिंकिट कुछ शहरों में मुनाफा कमा रहा है, लेकिन नए शहरों में विस्तार के कारण उनका खर्च बढ़ा हुआ है. स्विगी का घाटा भी कम हुआ है, लेकिन वे अभी पूरी तरह मुनाफे में नहीं आए हैं.