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ईडी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर फिलहाल रोक

सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो भी सुरक्षित रखने को कहा

  • मेहता और सिब्बल का वाकयुद्ध

  • मामला सीबीआई को सौंप दिया जाए

  • चुनाव से ठीक पहले ऐसी छापामारी क्यों

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट की वजह से अब ईडी फिलहाल बंगाल में चैन की सांस ले सकती है क्योंकि उसके खिलाफ जारी पुलिस जांच को शीर्ष अदालत ने रोक दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रही कानूनी खींचतान पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह मामला आईपैक कार्यालय में ईडी की छापेमारी और उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप से उपजे विवाद से संबंधित है। शीर्ष अदालत में दो चरणों में लगभग ढाई घंटे तक बहस चली। सुबह 11:30 बजे शुरू हुई कार्यवाही दोपहर के भोजन के अवकाश के बाद भी जारी रही, जिसमें दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों ने तीखी दलीलें पेश कीं।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब ईडी की टीम पीएमएलए कानून के तहत करोड़ों रुपये के अंतरराज्यीय वित्तीय घोटाले की जांच करने पहुंची थी, तब मुख्यमंत्री खुद पुलिस बल के साथ वहां घुस गईं। मेहता ने इसे जांच में बाधा और साक्ष्यों की चोरी के समान बताया।

उन्होंने कहा कि पुलिस और राज्य प्रशासन मिलकर केंद्रीय एजेंसियों के मनोबल को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ईडी ने व्हाट्सएप संदेशों का हवाला देते हुए दावा किया कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित थी और इसकी निष्पक्ष जांच के लिए मामला सीबीआई को सौंपा जाना चाहिए।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि यह छापेमारी पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोयला घोटाले की जांच जो 2024 की शुरुआत से चल रही थी, उसमें चुनाव के ठीक पहले छापेमारी की क्या आवश्यकता थी?

सिब्बल ने कहा कि आईपैक कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस के संवेदनशील और चुनावी डेटा मौजूद थे, और पार्टी की गोपनीयता की रक्षा करना ममता बनर्जी का अधिकार और कर्तव्य है। उन्होंने ईडी के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री ने डिजिटल उपकरण चोरी किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि कानून का शासन बनाए रखना और एजेंसियों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी को राजनीतिक कार्यों में हस्तक्षेप का हक नहीं है, लेकिन यदि जांच नेक इरादे से की जा रही है, तो उसे रोका भी नहीं जा सकता।

अंततः, कोर्ट ने ईडी के खिलाफ दर्ज पुलिस एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी और पुलिस जांच को स्थगित कर दिया। साथ ही, उस क्षेत्र के सभी सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने का आदेश दिया गया ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो सके।