इंदौर : शहर के भागीरथपुरा में 15 लोगों की मौत अचानक नहीं हो गई. अस्पतालों में 200 और आईसीयू में 45 मरीज यूं ही नहीं पहुंच गए. मरीज लगातार मौत के शिकार हो रहे हैं, लेकिन बेशर्म सिस्टम अभी 8 मौतों पर डटा है. ये 8 की संख्या स्वीकार करने में भी प्रशासन को 48 घंटे से ज्यादा समय लगा.
शुरू में पहले 2, फिर 3 और फिर 4 मौतें स्वीकार की. जब ज्यादा हल्ला मचा तो 8 तक पहुंच गए. इस दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री, नगर निगम प्रशासन के साथ ही महापौर और कलेक्टर स्वीकार कर रहे हैं कि लापरवाही तो हुई. महापौर व क्षेत्रीय पार्षद के खुलासे गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.
इंदौर महापौर का खुलासा, क्या कहानी बयां करता है
इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और क्षेत्रीय पार्षद ने एक और ऐसा खुलासा कर दिया, जिससे पूरा सरकारी सिस्टम बेनकाब हो गया. महापौर ने पुष्यमित्र भार्गव खुलासा करते हुए बताया “भागीरथपुरा में पानी की पाइप लाइन बदलने के लिए 7 माह पहले आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन उसके बाद भी टेंडर नहीं निकले.” क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला ने दावा किया “उन्होंने पानी की पाइपलाइन खराब होने की जानकारी पत्र के माध्यम से 3 साल पहले ही अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन उसके बाद भी किसी तरह का कोई काम नहीं किया गया.”
6 माह से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया “ये घटना काफी निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है. पानी की टंकी से जो मैन लाइन जा रही थी, उसमें डैमेज और सीवरेज का पानी मिल रहा था. फिलहाल उसे ट्रेस आउट कर लिया गया है. इंदौर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार जांच कर रही है. हम इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं लेकिन भविष्य में ना हो, इसको लेकर जांच की जा रही है.” महापौर ने यह भी कहा “6 महीने पहले जहां गंदे पानी से संबंधित सूचनाएं मिल रही थीं, वहां पर पानी की पाइप लाइन बदलने के निर्देश दिए थे.”
पाइप लाइन बदलने के लिए 6 माह पहले टेंडर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया “भगीरथपुरा में पानी की पाइपलाइन को बदलने के सातवें महीने में टेंडर भी निकाल दिए गए थे लेकिन उसके बाद भी वहां पर काम शुरू नहीं हुआ. इसको लेकर मैंने जांच के निर्देश दिए हैं और इस पूरे घटनाक्रम में जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.”
भाजपा पार्षद कमल वाघेला का कहना है “मैंने 3 साल पहले पत्र लिखकर नगर निगम के अधिकारियों को बताया कि पेयजल की पाइपलाइन डैमेज हो चुकी है. उसे बदल देना चाहिए. टेंडर 6 महीने पहले हो चुके थे लेकिन उसके वर्क ऑर्डर नहीं हुए. इसकी शिकायत भी मैंने की थी. यदि समय पर सब कुछ काम हो जाता तो यह घटनाक्रम नहीं घटित होता.”
अभी भी नगर निगम सीवेज का लीकेज खोजने में नाकाम
मौके पर आलम यह है कि नगर निगम के अधिकारी और जेसीबी भागीरथपुरा में जहां-तहां गड्ढे खोदकर लाइन लीकेज का पता लगाने में जुटे हैं. हालांकि बीते दिनों दावा किया गया था कि लाइन का मुख्य लीकेज मिल गया है. लिहाजा भागीरथपुरा पानी की टंकी के पास पुलिस चौकी के शौचालय से पानी की लाइन में लीकेज मानकर शौचालय को तोड़ने के बाद हल्की सी सीमेंट लगाकर लाइन लीकेज को बंद कर दिया गया. इसके बावजूद लोगों के बीमार होने का सिलसिला जारी है.
क्या दूषित पानी से मामला इतना गंभीर हो सकता है
गंदे पानी से अचानक इतने लोगों की मौत होना और सैकड़ों लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की वजह अब डॉक्टर भी दूषित पानी को मानने की स्थिति में नहीं हैं. क्षेत्रीय पार्षद कमल बघेला का कहना है “दूषित पानी से इतनी मौतें संभव नहीं हैं. पहले दिन से ही उन्होंने या तो पानी में कोई जहरीला केमिकल या अधिक मात्रा में क्लोरीन मिला दिए जाने की सूचना नगर निगम के संबंध सब इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर को दी थी.”
पोस्टमार्टम नहीं कराना किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं
शासन-प्रशासन की नाकामी का आलम यह है कि इतनी बड़ी घटना के कई दिन गुजर जाने के बाद भी न तो अभी तक मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट आ पाई है, न ही किसी का पोस्टमार्टम ही हो सका है. अब पानी साफ करने को लेकर किसी जहरीले केमिकल की आशंका जताई जा रही है. प्रदेश में सबसे ज्यादा साधन संपन्न और जल वितरण को लेकर वाटर प्लस अवार्ड लेने वाले इंदौर शहर में ना तो लाइन लीकेज पता लगाने की कोई सटीक व्यवस्था है और न ही जल वितरण के पूर्व जांच और उसके शुद्धिकरण की निगरानी की कोई प्रक्रिया.
कांग्रेस के आरोप भी काफी गंभीर हैं
कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाते हुए कहा “भागीरथपुरा में दूषित पानी के बहाने सच को छुपाया जा रहा है. क्योंकि पानी को साफ करने के लिए एक जनप्रतिनिधि के कहने पर नगर निगम के कर्मचारियों ने बड़ी मात्रा में पोटेशियम क्लोराइड (नीला थोथा) पानी में मिला दिया. पूरे मामले में किसी भी एक व्यक्ति का अब तक पोस्टमार्टम नहीं होना, अभी आश्चर्यजनक है.” उन्होंने पूरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री को भेजी है.
सप्ताह भर में भी जांच रिपोर्ट नहीं आई
मध्य प्रदेश नहीं बल्कि देशभर में सुर्खियां बना यह मुद्दा स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए इतना औपचारिक है कि विभाग ने ना तो किसी का पोस्टमार्टम कराया, ना ही तमाम तरह की जांचों के बाद कोई मेडिकल रिपोर्ट अब तक आ सकी. इधर, जिला प्रशासन के अधिकारी भी रिपोर्ट को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग के भरोसे बैठे हैं, जहां अब तक सैकड़ों मरीजों की ब्लड कल्चरल रिपोर्ट ही तैयार नहीं हो सकी है.
मौतों के असली कारणों पर अभी भी धुंध छाई
स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉ माधव हसानी रिपोर्ट के लिए मेडिकल कॉलेज के भरोसे बैठे हैं. ऐसी स्थिति में मौत के वास्तविक कारण को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. यही वजह है कि शुरुआती दिनों से लोगों के बीमार होने और मृत्यु का कारण सिर्फ कॉन्टैमिनेटेड वॉटर को बताया जा रहा है. इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है “मामले की हर एंगल से गहराई से जांच चल रही है. सभी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. पहली प्राथमिकता लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के अलावा अस्पतालों में भर्ती लोगों को बेहतर इलाज करवाना है.”