Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

“महाभारत का वो पल जब दुर्योधन का आत्मविश्वास डगमगा गया, क्या केवल श्रीकृष्ण ही थे इसकी वजह?”

 द्वापर युग के अंत में महाभारत का युद्ध हुआ था. ये युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच लड़ा गया था. महाभारत का युद्ध आज 5000 साल बाद भी सबसे बड़ा और भयानक युद्ध माना जाता है. महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म के बीच का युद्ध था, जिसमें अंत में विजय धर्म यानी पांडवों की हुई थी. महाभारत का युद्ध दुर्योधन के अहंकार का परिणाम था. वो पांडवों को उनका हिस्सा नहीं देना चाहता था.

दुर्योधन हमेशा से पांडवों से युद्ध ही चाहता था. क्योंकि उसे भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य, अपने मित्र कर्ण, कृपाचार्य और अश्वत्थामा की ताकत का घमंड था. उसे लगता था कि संसार की कोई भी सेना इन महारथियों का सामना करने के लिए आगे नहीं आएगी. फिर कुरुक्षेत्र में पांडवों और कौरवों की सेना आमने-सामने आई. कौरवों की सेना पांडवों से बड़ी थी, लेकिन दुर्योधन फिर भी डर गया था.

कौरवों के पास 11 तो पांडवों के पास थी 7 अक्षौहिणी सेना

महाभारत युद्ध में कौरवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी, जबकि पांडवों के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी. जाहिर है कौरवों की सेना पांडवों से काफी बड़ी थी. ऊपर से भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथी योद्धा कौरवों के पक्ष में युद्ध लड़ रहे थे. पांडवों की ओर भी महारथियों की कमी थी और सबसे बड़ी बात की भगवान श्रीकृष्ण स्वयं इस युद्ध में अर्जुन के सारथी थे. धर्म पांडवों की ओर था.

दुर्योधन के डर के बहुत से थे कारण

पांडवों से बड़ी सेना होने के बावजूद दुर्योधन इसलिए डर गया था, क्योंकि उसको अर्जुन के पराक्रम के भय था. साथ ही वो ये भी जानता था कि भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य जैसे महाराथी जो उसकी ओर से युद्ध लड़ रहे हैं, वो विजय के लिए नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए लड़ रहे हैं. दुर्योधन को ये भी ज्ञात था कि पांडवों के साथ श्रीकृष्ण हैं और उनकी व अर्जुन की जोड़ी के आगे कोई भी विशाल सेना टिक नहीं सकती.

महाभारत के युद्ध में अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु के बाद अर्जुन का क्रोध बहुत प्रचंड हो चुका था. अर्जुन के क्रोध को देखकर भी दुर्योधन डर गया था.