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कश्मीर में फिदायीन हमले का अलर्ट: सेना ने तैयार किया ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’, आतंकियों की हर चाल होगी नाकाम

जम्मू-कश्मीर में संभावित आतंकी हमलों की आशंका को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) इस समय सीमावर्ती और अत्यंत संवेदनशील इलाकों में एक व्यापक संयुक्त अभियान चला रहे हैं. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसी भी फिदायीन हमले की साजिश को शुरुआती स्तर पर ही नाकाम करना और सुरक्षा बलों की जमीनी तैयारियों का आकलन करना है.

खुफिया एजेंसियों से लगातार ऐसे इनपुट मिल रहे हैं कि आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर के सरहदी क्षेत्रों में सक्रिय स्लीपर सेल के जरिए सुरक्षा बलों के कैंप, पुलिस थानों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की फिराक में हैं.

इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए यह अभ्यास शुरू किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सेना, पुलिस और विशेष बलों के बीच बेहतर तालमेल के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

सुरक्षाबलोंने शुरू की सघन तलाशी

संयुक्त अभियान के दौरान पूरे इलाके की बहुस्तरीय घेराबंदी की जा रही है. संदिग्ध स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं और त्वरित प्रतिक्रिया दल को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है. इसके साथ ही बंधक बनाए जाने जैसी स्थितियों से निपटने, इमारतों में घुसकर आतंकियों को निष्क्रिय करने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास भी किया जा रहा है. ड्रोन के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है और आधुनिक हथियारों व संचार प्रणालियों की प्रभावशीलता भी परखी जा रही है.

गौरतलब है कि जम्मू क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 2015 में कठुआ जिले के इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला हो चुका है. उस दौरान आतंकियों ने पहले हीरानगर थाना क्षेत्र में फायरिंग की थी और बाद में राजबाग पुलिस स्टेशन को निशाना बनाकर बड़े नुकसान की कोशिश की थी. भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उस हमले को विफल किया था, लेकिन इस दौरान कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी.

लश्कर-ए-तैयबा ने बदली अपनी रणनीति

2015 के बाद जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और फिदायीन हमलों की जगह हिट एंड रन नीति अपनाई. इसके तहत जंगलों में छिपे आतंकी घात लगाकर सुरक्षा बलों पर हमला करते और फिर दुर्गम इलाकों में वापस छिप जाते थे, जिससे उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता था.

हालांकि, हाल ही में दिल्ली में हुए आत्मघाती कार ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि जैश और लश्कर एक बार फिर अपनी रणनीति बदल सकते हैं. खुफिया इनपुट के मुताबिक, आतंकी संगठन फिदायीन हमलों के जरिए जम्मू कश्मीर में दहशत फैलाने की साजिश रच रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका की भी आशंका जताई जा रही है.

इन्हीं खतरों को ध्यान में रखते हुए जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है. जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, एनएसजी और अन्य केंद्रीय बल मिलकर लगातार अभ्यास और जमीनी ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि किसी भी संभावित हमले को समय रहते नाकाम किया जा सके और आम नागरिकों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जा सके.