Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Govinda Karisma Kapoor Movies Breakup: क्यों टूटी गोविंदा और करिश्मा कपूर की सुपरहिट जोड़ी? शगुफ्ता ... भारत बनाम जिम्बाब्वे T20I: अभिषेक शर्मा ने गेंद से मचाया तहलका, 14 साल बाद दोहराया सहवाग का ऐतिहासिक... रूस-यूक्रेन युद्ध में भीषण पलटवार, जपोरिज्जिया में 12 और सुमी में 3 लोगों की मौत से बढ़ा तनाव बैंक ग्राहकों के लिए अच्छी खबर, इस सप्ताह सोमवार से शनिवार तक खुले रहेंगे सभी सरकारी और निजी बैंक बच्चों के लिए ज्यादा सुरक्षित होगा ChatGPT, OpenAI ने पेश किए नए 'टीन फीचर्स' और चाइल्ड सेफ्टी ब्लूप... आज आषाढ़ मास का रवि प्रदोष व्रत, जानें प्रदोष काल पूजा विधि और महादेव की कृपा पाने के विशेष उपाय मानसून के मौसम में जन्नत जैसा अहसास कराता है 'बादलों का घर' मेघालय, हरियाली और वादियों का लें मज़ा नोएडा सेक्टर-150 की एल्डिको सोसाइटी में दर्दनाक हादसा, STP टैंक में जहरीली गैस से दो लोगों की मौत Amroha Three Sisters Marriage Law: अमरोहा में 3 बहनों से शादी का मामला; जानिए हिंदू मैरिज एक्ट और BN... संभल में गंगा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, अनियंत्रित होकर पलटी डबल डेकर बस; 2 की मौत और 24 घायल

ढहने वाला है खामेनेई का किला! ईरान की सड़कों पर छिड़ा गृहयुद्ध, ये 5 संकेत दे रहे हैं बड़े बदलाव की आहट

ईरान की सड़कों पर एक बार फिर व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. बीते तीन दिनों से देश की सड़कों, गलियों और छतों से एक ही नारा गूंज रहा है-तानाशाह मरेगा. ये नारे सीधे तौर पर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को चुनौती देते हैं. 86 वर्षीय खामेनेई, जिन्होंने दशकों तक अपने शासन को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खतरों से बचाने की कोशिश की, आज अपने अब तक के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं.

देश के भीतर बढ़ता जन असंतोष, गहराता आर्थिक संकट और बाहर से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव उनके शासन की नींव को लगातार कमजोर कर रहा है. अब सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान एक बड़े राजनीतिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है? आइए, इन 5 अहम संकेतों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं कि हालात किस ओर इशारा कर रहे हैं.

1. युवा वर्ग में बढ़ता असंतोष

ईरान के युवा अब खुले तौर पर इस्लामिक नियमों की अवहेलना कर रहे हैं. दिसंबर के शुरुआत में किश आइलैंड पर हुई एक मैराथन इसकी मिसाल है, जहां सैकड़ों महिलाएं बिना हिजाब या ढीले-ढाले बालों के साथ दौड़ती नजर आईं. आयोजकों की ओर से दिए गए हेडस्कार्फ को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया. जिस देश में ड्रेस कोड तोड़ने पर जुर्माना और जेल तक हो सकती है, वहां युवाओं का यह रवैया साफ संकेत है कि सत्ता का डर कमजोर पड़ चुका है.

2. गहराता आर्थिक संकट

ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में महंगाई दर 42.2% तक पहुंच गई. खाने-पीने की चीजें साल भर में 72% महंगी हो चुकी हैं, जबकि दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतों में 50% की बढ़ोतरी हुई है. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई. इसी के विरोध में तेहरान समेत कई शहरों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं और सड़कों पर उतर आए. लोगों का विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है.

3. पानी और बुनियादी संसाधनों की किल्लत

ईरान के कई शहर इस वक्त पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं. शहरों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ रही है और ग्रामीण इलाकों में हालात और बदतर हैं. देश के 20 से ज्यादा प्रांत महीनों से एक बूंद पानी को तरस रहे हैं. ये हाल केवल 2025 का संकट नहीं है, बल्कि ईरान पिछले छह वर्षों से लगातार सूखे की मार झेल रहा है. जब बुनियादी जरूरतें ही पूरी न हों, तो गुस्सा सड़कों पर उतरना तय है और यही अब ईरान में हो रहा है.

4. प्रदर्शनों की वापसी

यह विरोध प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए देशव्यापी आंदोलन के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं. इस हफ्ते कई शहरों में बाजार बंद रहे, दुकानदार और व्यापारी सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाए. विश्वविद्यालय भी विरोध का बड़ा केंद्र बनकर उभरे हैं.

5. अंतरराष्ट्रीय मंच पर घिरता ईरान

ईरान पर बाहरी दबाव भी लगातार बढ़ रहा है. इजराइलल अमेरिका पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा है. इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान में असली बदलाव अंदर से ही आएगा. वहीं निर्वासित शहजादे रज़ा पहलवी ने ईरानियों से अपील की है कि वे विरोध और हड़तालों को और तेज करें. कुलजमा बात ये है कि हालात तेजी से खामेनेई के हाथ से फिसलते दिख रहे हैं.