Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
BJP vs Rahul Gandhi: 'देश में आने वाला है आर्थिक तूफान...' रायबरेली में गरजे राहुल; बीजेपी ने बताया ... BC Khanduri Passes Away: पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी के निधन पर भावुक हुए पुष्कर सिंह धामी; पार्थिव शरीर... Bijnor Crime News: बिजनौर में बीजेपी नेता सुरेश भगत पर केस दर्ज; पुलिस के सामने घर में घुसकर पीटा, ग... Karnal Pradeep Mishra Katha: पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से पहले करनाल में बवाल; VIP पास को लेकर मारप... Indore Weather Update: इंदौर में गर्मी का 10 साल का रिकॉर्ड टूटा! सड़कों पर पसरा सन्नाटा, जानें मौसम... BRICS Summit Indore: इंदौर में ब्रिक्स युवा उद्यमिता बैठक आज से; केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ... Indore Dog Bite Cases: इंदौर में नसबंदी के दावों के बीच श्वानों का आतंक; 1 साल में 60 हजार से ज्यादा... Indore IET Hostel: आईईटी हॉस्टल तोड़फोड़ मामले में नया मोड़, छात्रों ने वीडियो जारी कर मांगी माफी; ख... Indore IET Hostel: आईईटी हॉस्टल गांजा पार्टी मामले में DAVV का बड़ा एक्शन; 3 छात्र सस्पेंड, 1 का एडम... MP New Transfer Policy: मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के तबादलों से हटेगी रोक! आज मोहन यादव कैबिनेट बै...

स्पर्म स्टेम सेल ट्रांसप्लांट का सफल प्रयोग

कैंसर पर जीत के बाद पितृत्व की नई उम्मीद

  • अनेक लोगों को होगा इससे फायदा

  • क्रायोप्रेजर्वेशन तकनीक का प्रयोग हुआ

  • दूसरी बीमारियों में भी इससे फायदा होगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः चिकित्सा जगत ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसे अब तक असंभव माना जाता था। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक वयस्क पुरुष में उसकी बचपन की स्पर्मेटोगोनियल स्टेम सेल्स का सफल प्रत्यारोपण किया है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए एक वरदान की तरह है, जिन्होंने बचपन में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान अपनी प्रजनन क्षमता खो दी थी।

देखें इससे संबंधित वीडियो

जब किसी बच्चे को कैंसर होता है, तो कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसे उपचार उसके जीवन को तो बचा लेते हैं, लेकिन इन उपचारों का एक बहुत ही गहरा दुष्प्रभाव होता है। ये प्रक्रियाएं शरीर में मौजूद उन नाजुक स्टेम कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं जो भविष्य में शुक्राणु बनाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। चूंकि बच्चे यौवन तक नहीं पहुंचे होते, इसलिए उनके स्पर्म को भविष्य के लिए फ्रीज करना भी संभव नहीं होता। दशकों से यह एक ऐसी समस्या थी जिसका कोई ठोस समाधान उपलब्ध नहीं था।

इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की शुरुआत लगभग 20 साल पहले हुई थी, जब एक कैंसर पीड़ित बच्चे के वृषण ऊतक के एक छोटे से हिस्से को उपचार शुरू होने से पहले बायोप्सी के जरिए निकाला गया और उसे क्रायोप्रेजर्वेशन तकनीक की मदद से बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रख लिया गया।

हाल ही में, जब वह बच्चा वयस्क हुआ, तो शोधकर्ताओं की एक टीम ने उन जमे हुए ऊतकों से स्टेम कोशिकाओं को अलग किया। अत्याधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का उपयोग करते हुए, इन कोशिकाओं को पुनर्जीवित किया गया और उनकी संख्या बढ़ाई गई। इसके बाद, एक सूक्ष्म सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से इन कोशिकाओं को वापस उस पुरुष के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया।

कुछ महीनों के गहन अवलोकन के बाद, डॉक्टरों ने पाया कि वे स्टेम कोशिकाएं न केवल जीवित रहीं, बल्कि उन्होंने सामान्य शुक्राणु उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। यह इस बात का प्रमाण था कि शरीर ने दशकों पुरानी कोशिकाओं को स्वीकार कर लिया और प्राकृतिक जैविक घड़ी को फिर से शुरू कर दिया।

इस तकनीक की सफलता केवल कैंसर सर्वाइवर्स तक सीमित नहीं है। यह चिकित्सा विज्ञान के लिए निम्नलिखित द्वार खोलती है। उन पुरुषों के लिए आशा जो अनुवांशिक कारणों से शुक्राणु बनाने में असमर्थ हैं। भविष्य में इस तकनीक का उपयोग पुरुष प्रजनन क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किया जा सकता है। यह अध्ययन अन्य अंगों के स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के लिए एक ब्लूप्रिंट का काम करेगा। यह सफलता रीजेनरेटिव मेडिसिन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है, जो यह साबित करती है कि विज्ञान समय की गति को पीछे मोड़कर शरीर की खोई हुई क्षमताओं को वापस ला सकता है।

#विज्ञान #चिकित्सा_चमत्कार #कैंसर_सर्वाइवर #स्टेम_सेल #प्रजनन_क्षमता #MedicalBreakthrough #StemCellResearch #CancerSurvivor #FertilityScience #Innovation2025