Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Punjab Drug Menace: सरेआम चिट्टे का खेल! इंजेक्शन लगाते युवकों का वीडियो वायरल, दावों की खुली पोल Fake Policeman Arrested: पुलिस की वर्दी पहनकर वसूली करने वाला 'फर्जी पुलिसकर्मी' गिरफ्तार Jalandhar News: जालंधर में गन पॉइंट पर लूट, युवक को बेरहमी से पीटा, भड़के लोगों ने लगाया रोड जाम CM Bhagwant Mann Hospitalized: मोगा रैली के बाद सीएम भगवंत मान की बिगड़ी तबीयत, फोर्टिस अस्पताल में ... Ranchi Municipal Election: बीजेपी समर्थित मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो का इंटरव्यू, बताया अपना विजन Deoghar Municipal Election 2026: देवघर नगर निगम चुनाव में चुनावी शोर, पारंपरिक सुरों संग प्रचार तेज Jharkhand Voting: सुविधा लेने में नंबर-1, वोटिंग में फिसड्डी; रांची समेत इन 4 शहरों का बुरा हाल Palamu News: पलामू में गोलगप्पा खाने से 150 से ज्यादा बच्चे बीमार, फूड पॉइजनिंग से मचा हड़कंप Delhi Assembly: 'फांसी घर' मामले में अरविंद केजरीवाल को अल्टिमेटम, विशेषाधिकार समिति के सामने होना ह... Delhi News: यमुना पार का होगा कायाकल्प, पूर्वी दिल्ली को ₹1075 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

केंद्र के जी राम जी कानून के खिलाफ बड़ा आंदोलन

एसकेएम का 16 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया है। हाल ही में पारित किए गए कानूनों के समूह, विशेष रूप से मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून जी राम जी के विरोध में मोर्चा ने 16 जनवरी 2026 को ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसकेएम के नेताओं ने जी राम जी को तत्काल निरस्त करने की मांग की। किसान नेताओं का तर्क है कि यह नया कानून काम के उस कानूनी अधिकार को खत्म कर देता है जो पिछले दो दशकों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे (मनरेगा) की आत्मा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस कानून को बिना किसी पर्याप्त बहस के और विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया।

किसान मंच ने एनडीए सरकार द्वारा पारित या प्रस्तावित अन्य विधेयकों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है। इनमें नए श्रम कोड, बीज विधेयक 2025 और बिजली विधेयक 2025 शामिल हैं। एसकेएम ने अपनी पुरानी मांग को फिर से सामने रखा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी दी जाए।

नेताओं ने सरकार को तानाशाह और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इस कानून को मनरेगा की जगह लेने के लिए संसद में बुलडोज किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि मनरेगा ने कृषि संकट, आर्थिक मंदी और महामारी के वर्षों के दौरान ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में काम किया था।

किसान संगठन ने बीमा विधेयक 2025 और शांति विधेयक 2025 की भी आलोचना की, जिसमें क्रमश: 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है। एसकेएम का दावा है कि ये कदम श्रमिकों या किसानों के बजाय बड़े कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों को साधने के लिए उठाए गए हैं।

एसकेएम ने ग्रामीण कार्यकर्ताओं और किसानों से अपील की है कि वे गांव स्तर पर महापंचायतें आयोजित करें और नए साल में इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लें। मोर्चा ने किसान आत्महत्याओं और पलायन को रोकने के लिए व्यापक कर्ज माफी की मांग भी दोहराई। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तय करने के लिए 11 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी।