एसकेएम का 16 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया है। हाल ही में पारित किए गए कानूनों के समूह, विशेष रूप से मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून जी राम जी के विरोध में मोर्चा ने 16 जनवरी 2026 को ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसकेएम के नेताओं ने जी राम जी को तत्काल निरस्त करने की मांग की। किसान नेताओं का तर्क है कि यह नया कानून काम के उस कानूनी अधिकार को खत्म कर देता है जो पिछले दो दशकों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे (मनरेगा) की आत्मा रहा है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस कानून को बिना किसी पर्याप्त बहस के और विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए संसद में जल्दबाजी में पारित किया गया।
किसान मंच ने एनडीए सरकार द्वारा पारित या प्रस्तावित अन्य विधेयकों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है। इनमें नए श्रम कोड, बीज विधेयक 2025 और बिजली विधेयक 2025 शामिल हैं। एसकेएम ने अपनी पुरानी मांग को फिर से सामने रखा कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की वैधानिक गारंटी दी जाए।
नेताओं ने सरकार को तानाशाह और जनविरोधी बताते हुए कहा कि इस कानून को मनरेगा की जगह लेने के लिए संसद में बुलडोज किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि मनरेगा ने कृषि संकट, आर्थिक मंदी और महामारी के वर्षों के दौरान ग्रामीण परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा के रूप में काम किया था।
किसान संगठन ने बीमा विधेयक 2025 और शांति विधेयक 2025 की भी आलोचना की, जिसमें क्रमश: 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी की अनुमति दी गई है। एसकेएम का दावा है कि ये कदम श्रमिकों या किसानों के बजाय बड़े कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों को साधने के लिए उठाए गए हैं।
एसकेएम ने ग्रामीण कार्यकर्ताओं और किसानों से अपील की है कि वे गांव स्तर पर महापंचायतें आयोजित करें और नए साल में इन कानूनों के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लें। मोर्चा ने किसान आत्महत्याओं और पलायन को रोकने के लिए व्यापक कर्ज माफी की मांग भी दोहराई। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तय करने के लिए 11 जनवरी को दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक होगी।