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”साहब, मैं तो जिंदा हूं”: जशपुर सिटी कोतवाली पुलिस के उड़े मुर्दा युवक को देख होश

जशपुर: फर्ज करें, आपने जिसे मरा मान लिया हो, अगर वो जिंदा आपके सामने आकर खड़ा हो जाए, तो आपकी हालत कैसी होगी. कुछ ऐसी ही हालत जशपुर सिटी कोतवाली पुलिस की भी हो गई, जब मृत मान लिया गया युवक खुद थाने पहुंच गया और अपने जिंदा होने का प्रमाण पुलिस को दिया. युवक को जिंदा और भला चंगा देखकर पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए.

”साहब, मैं तो जिंदा हूं मरा नहीं”

दरअसल बीते दिनों सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हत्या का एक मामला सामने आया था. पुलिस जांच में शव की पहचान सीमित खाखा, निवासी सिटोंगा ग्राम, उम्र 30 साल के रुप में की गई. शव अधजली हालत में मिली थी. इस वजह से उसका चेहरा भी बिगड़ गया था. जिस अधजले शव को सिटी कोतवाली पुलिस ने सीमित खाखा का शव माना था, वो युवक खुद अपने पैरों पर चलकर थाने पहुंच गया. युवक ने सिटी कोतवाली में आते ही पुलिस वालों को बताया कि वो जिंदा है, जिसे आप लोगों ने मृत मान लिया है. पुलिस को जैसे ही पता चला कि सीमित खाखा जिंदा है, उसके होश उड़ गए.

पुलिस के भी फूल गए हाथ पांव

युवक ने बताया कि उसकी न तो हत्या हुई है, न उसे किसी ने मारा है. वो तो रोजगार की तलाश में झारखंड गया हुआ था. युवक की बातें सुनने के बाद थाने में मौजूद अफसर और कर्मचारी दोनों चकरा गए. युवक के परिजन और ग्रामीण भी युवक के घर लौट आने से स्तब्ध हैं. परिवार वाले खुश भी हैं और दुखी भी कि उन्होने अपने ही बेटे को मृत मान लिया था. युवक के जीवित लौट आने के बाद अब सिटी कोतवाली पुलिस अधजले लाश की पहचान का काम नए सिरे से शुरू करेगी.

22 अक्टूबर को जंगल में मिली थी अधजली लाश

दरअसल, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पुरनानगर–बालाछापर के बीच स्थित तुरीटोंगरी जंगल में 22 अक्टूबर को एक युवक की अधजली लाश मिली. शव जंगल में एक गड्ढे में पड़ा हुआ था. शव का चेहरा सहित शरीर का अधिकांश हिस्सा जल चुका था. पुलिस ने पंचनामा और मौका ए वारदात का मुआयना करने के बाद मर्ग कामय किया. पुलिस ने बाद में शव का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हत्या किया जाना पाया गया. थाना सिटी कोतवाली जशपुर में बी.एन.एस. की धारा 103(1) एवं 238(क) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई.

पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल, परिजनों के द्वारा शिनाख्ती पर भी सवाल खड़े

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि ग्राम सीटोंगा निवासी सीमित खाखा कुछ दिनों पूर्व अपने साथियों के साथ झारखंड के हजारीबाग में मजदूरी करने गया था, लेकिन उसके साथी वापस लौट आए सीमित खाखा नहीं लौटा. पुलिस के अनुसार 17 अक्टूबर को सीमित खाखा अपने साथियों रामजीत राम (25 वर्ष), विरेंद्र राम (24 वर्ष) और एक विधि से संघर्षरत बालक के साथ जशपुर लौटा और बस से उतरकर बांकी टोली स्थित बांकी नदी पुलिया के पास पहुंचा. यहां सभी ने जमकर शराब पी. नशे की हालत में कमीशन की राशि को लेकर विवाद हुआ. पुलिस के मुताबिक इसी विवाद में रामजीत राम ने सीमित के सीने में चाकू से वार किया, जबकि विरेंद्र राम ने लोहे की रॉड से हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या को छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को घटनास्थल से करीब 400 मीटर दूर जंगल के गड्ढे में डालकर पेट्रोल डालकर जलाने की कोशिश की.

मजिस्ट्रेट के सामने पहचान और कबूलनामा

प्रकरण में पुलिस ने अधजली लाश की पहचान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (नायब तहसीलदार) के समक्ष कराई. जहां सीमित खाखा की मां, पिता और भाई ने शव को सीमित खाखा का ही होना स्वीकार किया. इसके साथ ही पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट से पूरे घटनाक्रम का “सीन ऑफ क्राइम” रिक्रियेशन कराया. गिरफ्तार आरोपियों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कराए गए, जहां उन्होंने हत्या का अपराध स्वीकार किया. इन सभी प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई थी.

गिरफ्तार आरोपी और फरार आरोपियों की भी गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस ने पहले रामजीत राम, विरेंद्र राम और एक विधि से संघर्षरत बालक को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा था. बाद में फरार चल रहे 2 आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में आए. पुलिस ने शीतल मिंज (39 वर्ष), निवासी ग्राम सिटोंगा, थाना सिटी कोतवाली जशपुर, जीतू राम (32 वर्ष), निवासी बेंदरभद्रा, थाना कुनकुरी, जिला जशपुर दोनों को मुखबिर की सूचना और टेक्निकल टीम की मदद से गिरफ्तार कर जेल भेजा. आरोपियों के विरुद्ध बी.एन.एस. की धारा 103(1), 238(क), 61(2) तथा लूट से संबंधित धारा 127(1), 309(4), 298, 351(2) एवं 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किए गए.

शनिवार रात अचानक बदल गया पूरा मामला

शनिवार की रात पूरा मामला उस समय पलट गया, जब मृतक सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ सिटी कोतवाली थाना पहुंचा.
सरपंच कल्पना खलखो ने बताया कि सीमित झारखंड से आने वाली बस से उतरा और सिटोंगा जाने के लिए एक ऑटो में बैठा. ऑटो चालक सीमित को पहचानता था. उसी ने फोन कर उन्हें सूचना दी कि जिस युवक की हत्या के आरोप में लोग जेल में हैं, वही युवक जिंदा ऑटो में बैठा है. सूचना मिलते ही वह सीमित को लेकर सीधे कोतवाली थाना पहुंची.

सीमित खाखा ने पुलिस को क्या बताया

सीमित खाखा ने पुलिस को बताया कि वह रोजगार की तलाश में अपने साथियों के साथ झारखंड गया था. रांची पहुंचने के बाद वह अपने साथियों से अलग हो गया और गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव पहुंचकर खेत में मजदूरी करने लगा.उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, जिसके कारण वह अपने परिजनों या गांव वालों से संपर्क नहीं कर सका. अब वह क्रिसमस पर्व मनाने अपने घर लौट रहा था, तभी यह पूरा मामला सामने आया.

घटना पर एसडीओपी का बयान

एसडीओपी चंद्रशेखर परमा ने कहा, इस प्रकरण में पुलिस ने पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से कानून का पालन करते हुए कार्रवाई की है. अधजले शव की पहचान मृतक के माता, पिता और भाई द्वारा कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष की गई थी. आरोपियों के कथन न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कराए गए, जिसमें उन्होंने हत्या का अपराध स्वीकार किया था. दोनों ही प्रक्रियाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई है. सीमित खाखा के जीवित वापस आने के बाद अब पूरे मामले की नए सिरे से जांच की जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों की अस्थायी रिहाई की वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है.
एसएसपी का बयान

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा, इस प्रकरण के वास्तविक मृतक का पता लगाने हेतु राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई है. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई. प्रकरण की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई के लिए वैधानिक प्रक्रिया की जा रही है.