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ग्वालियर में 15 दिसंबर से सजेगी सुरों की मेहफिल, 101वें तानसेन संगीत समारोह में नहीं दिखेंगे विदेशी कलाकार

ग्वालियर: संगीत नगरी ग्वालियर में एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय तानसेन समारोह का आगाज होने जा रहा है. हालांकि 15 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस इंटरनेशनल इवेंट में इस साल विदेशी कलाकार नजर नहीं आएंगे. लेकिन इस समारोह में पांच दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर संगीत सभाओं का दौर चलेगा. जिसमें देशभर के विज्ञात संगीत कलाकार हिस्सा लेंगे.

शून्य मंदिर पर होगी समारोह की थीम

प्रमुख समारोह हर बार की तरह इस बार भी संगीत सम्राट तानसेन की समाधि स्थल हजीरा पर ही आयोजित होगा. शुभारंभ सभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हो सकते हैं. हर वर्ष की तरह इस बार भी तानसेन समारोह की थीम तय हो चुकी है. इस बार थीम में ग्वालियर का वैश्विक इतिहास नजर आने वाला है. तानसेन समारोह 2025 की थीम ग्वालियर के सुप्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर या कहें ‘शून्य’ मंदिर की थीम पर रहने वाला है.

स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मौका

इस बार तानसेन समारोह में सुप्रसिद्ध संगीत कलाकारों के साथ ही स्थानीय कलाकार और युवाओं को भी इस भव्य समारोह का हिस्सा बनने का मौका मिलने वाला है. इसकी जानकारी देते हुए उस्ताद अली खान और संगीत एवं कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर ने बताया कि “इस बार तानसेन समारोह में पद्मविभूषण और पद्मश्री अवार्डी कलाकारों के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभावान संगीत कलाकारों और युवा कलाकारों को भी तानसेन समारोह में प्रस्तुतियां देने का मौका मिलने जा रहा है. इस तरह से नई पीढ़ी के जरिए हमारे संगीत की कला आगे बढ़ती रहेगी.”

वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का इरादा

यह तानसेन समारोह का 101वां संस्करण है. इस मौके पर पिछले वर्ष की तरह इस साल भी कोई विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा. ये सवाल पूछे जाने पर संस्कृति विभाग के उपसंचालक अमित कुमार यादव ने बताया कि “इस साल अभी तक ऐसी कोई प्लानिंग नहीं है. पिछले साल तानसेन समारोह का शताब्दी वर्ष था और उसे यादगार बनाने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ग्वालियर के तानसेन समारोह की ओर से प्रयास किया गया था. लेकिन इस साल ऐसा नहीं होगा.”

इस दिन होगी उस्ताद अमजद अली खां की प्रस्तुति

वहीं, मीडिया से चर्चा के दौरान अमित कुमार यादव ने बताया कि “हर साल की तरह इस साल भी तानसेन समारोह गरिमा के अनुरूप ही आयोजित किया जा रहा है. समारोह में पद्मश्री कलाकार और देश के विख्यात कलाकार सहित विभिन्न अवॉर्ड्स से सम्मानित कलाकार शामिल होंगे. इनमें पद्म विभूषण उस्ताद अमजद अली खान भी शामिल हैं जो अमन अली और अयान अली बंगस के साथ प्रस्तुति देंगे. उनकी प्रस्तुति 16 दिसंबर को होगी. इनके साथ-साथ पंडित कुमार गन्धर्भ की सुपुत्री और संगीत नाट्य अकादमी से सम्मानित कलापिनी कोमकली हैं, पद्मश्री सम्मानित सुमित्रा गुहा, संजीव अभियंकर, मैसूर मंजूनाथ समेत कई ख्यात नाम कलाकार हैं. जिनकी प्रस्तुतियां समारोह के दौरान देखने को मिलेंगी.”

तानसेन समारोह एक अंतर्राष्ट्रीय संगीत समारोह बन चुका है, लेकिन इस साल समारोह में विदेशी कलाकारों को सुनने का मौका नहीं मिलेगा. मीडिया से बातचीत के दौरान जब संस्कृति विभाग के उप संचालक अमित कुमार यादव से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि “स्थानीय कलाकारों द्वारा इस बात की आपत्ति थी कि उन्हें समय नहीं मिलता और कलाकारों की संख्या बढ़ने से समय की कमी होती है.

इसके अलावा विदेशी कलाकारों के शामिल होने से भी लोगों की कहीं न कहीं आपत्ति नजर आई. इसलिए इस बार पिछले साल की तुलना में सिर्फ चार विदेशी कलाकारों को अप्रोच किया गया था. जिनमें से दो लोगों की ही हामी मिली थी लेकिन आखिरी समय में उनका आना भी नहीं हो पा रहा है. हालांकि विदेशी कलाकार के तौर पर 17 दिसंबर की पहली संगीत सभा में आखिरी प्रस्तुति रोम से आने वाले बांसुरी वादक सिमोन मैटिएली की होगी.”