Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पनीर के बैक्टीरिया पेट की सेहत के लिए वरदान दिल्ली पेलेट गन मामले में पहली FIR दर्ज: राहुल गांधी के 8 घंटे धरने के बाद BNS 118 व 125 में केस एक शब्द का गलत प्रयोग और मोदी की परेशानी पेलेट गन मामले में FIR की मांग पर संसद मार्ग थाने में धरने पर बैठे राहुल गांधी, BJP का पलटवार मसूरी-कैंपटी रोड पर भूस्खलन का कहर: सांझा दरबार के पास मकान और दुकान पूरी तरह ध्वस्त दिल्ली में प्रदूषण पर बड़ा एक्शन: 2,011 फैक्ट्रियों की जांच, 33 पर क्लोजर ऑर्डर और 44 पर लगा भारी जु... 'प्रति व्यक्ति आय में भारत बांग्लादेश से भी पिछड़ा': अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला 26/11 मुंबई हमला: हाफिज सईद और लखवी समेत 6 भगोड़ों पर चलेगा इन-एब्सेंटिया ट्रायल, MHA ने इंटरपोल से ... दिमागी नक्सल का वायरस कोलकाता भी आ पहुंचा सहारनपुर में व्यक्ति की चोटी काटकर की मारपीट: फसल पर चलाया ट्रैक्टर, SSP ऑफिस पहुंचे ब्राह्मण समाज क...

सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति में आरक्षण नहीं! सरकार ने लोकसभा में दिया स्पष्ट जवाब, कानून मंत्री ने बताया क्या है कारण

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में किसी भी जाति या वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है. मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत जजों की नियुक्ति होती है, जिनमें आरक्षण शामिल नहीं है. इसी कारण सरकार श्रेणीवार डेटा भी नहीं रखती.

सरकार ने बताया कि 2018 से हाई कोर्ट जज के लिए अनुशंसित उम्मीदवारों से उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का विवरण मांगा जा रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 28 नवंबर 2025 के बीच कुल 841 जज नियुक्त हुए, जिनमें 32 SC, 17 ST, 103 OBC, 46 अल्पसंख्यक समुदायों से और 129 महिलाएँ शामिल हैं.

लोकसभा में क्या बोले मंत्री रामदास अठावले?

केंद्रीय मंत्री अठावले ने बताया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की जिम्मेदारी मुख्य न्यायाधीश की होती है, जबकि हाई कोर्ट के जजों के प्रस्ताव संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भेजते हैं.

सरकार ने कहा कि वह न्यायपालिका में सामाजिक विविधता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक समुदायों और महिलाओं के योग्य उम्मीदवारों पर उचित विचार करने का आग्रह करती रही है. अंततः सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में नियुक्ति केवल उन्हीं व्यक्तियों की होती है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अनुशंसित करता है.

विपक्ष की ओर से उठाए गए थे सवाल

हाल फिलहाल में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए आरक्षण के प्रावधान को लेकर विपक्ष की ओर से कई सवाल उठाए गए थे. जिसके बाद अब सरकार ने साफ कर दिया है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजो की नियुक्ति के लिए संविधान में किसी भी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है.

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत कथित अपराध के लिए कुछ आरोपियों के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही सोमवार को रद्द कर दिया और कहा कि शिकायतकर्ता के घर को सार्वजनिक स्थल नहीं माना जा सकता. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कथित अपराधों के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी.