भोपाल: मध्य प्रदेश में प्याज अब किसानों के आंसू निकाल रही है. बाजार में प्याज के बेहतर दाम न मिलने के चलते किसान प्याज को सड़कों पर फेंक रहे हैं. विरोधस्वरूप लोगों को मुफ्त में प्याज बांटी जा रही है. उधर प्याज के उचित दाम न मिलने पर मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना ने अजीब बयान दिया है. प्याज के दामों को लेकर उन्होंने कहा कि आवक अच्छी हुई है, इसलिए फेंक रहे हैं न…आवक तो अच्छी हुई है. कांग्रेस के राज में तो प्याज होती ही नहीं थी. पानी नहीं मिलता था इसलिए प्याज नहीं होती थी. प्याज क्या, कोई भी फसल नहीं होती थी.
मंत्री बोले- अधिक पैदावार से गिरे दाम
कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के राज में पानी नहीं था, बिजली नहीं थी, सड़क भी नहीं थी. आज सब कुछ है, इसलिए आज हमारा मध्य प्रदेश… चाहे वह खाद का मसला हो और इसकी आवक बढ़ी है. उन्होंने कहा कि प्याज की अधिक पैदावार होने के कारण इसकी कीमतें गिर रही हैं और इसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें, सरकार इसका समाधान निकालेगी. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने की कोशिश कर रही है.
थोक में 50 पैसे रुपए में बिक रही प्याज
फुटकर बाजार में आम लोगों को भले ही प्याज 10 से 15 रुपए में मिल रही हो, लेकिन थोक बाजार में प्याज अधिकतम 50 पैसे से 1 रुपये किलो में बिक रही है. मंडी में प्याज बेचने के बाद किसानों के भाड़े का किराया भी नहीं निकल पा रहा है और इससे किसान गुस्से में हैं. सीहोर के रहने वाले मनोहर सिंह बताते हैं कि उन्होंने एक एकड़ में प्याज की फसल लगाई थी. खाद, बीज, दवाई, मजदूरी मिलाकर करीबन 50 हजार रुपये का खर्च आया, लेकिन अब मंडी में प्याज का जो दाम मिल रहा है, उससे फसल उगाने का खर्चा ही नहीं निकल पा रहा. थोक बाजार में प्याज के ज्यादा से ज्यादा 1 रुपए किलो का भाव ही मिल रहा है.
भावांतर में प्याज को शामिल करने की मांग
यही स्थिति सोमवार को चंदेरी से भोपाल प्याज बेचने आए किसान एमएस मेवाड़ा के सामने बनी थी. वे जब यहां प्याज बेचने आए तो उन्हें मंडी में प्याज के 10 रुपए कट्टी यानी 40 पैसे प्रति किलो प्याज का दाम मिला. इस दाम में उनका भाड़ा भी नहीं निकला. उधर किसान अब सरकार से प्याज को भावांतर में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.