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सूडान में आरएसएफ के ड्रोन हमले में 50 की मौत

तमाम मानवाधिकार संगठनों की शिकायत का असर नहीं

दारफूरः सूडान में जारी संघर्ष में मानवाधिकारों का उल्लंघन एक नए और भयावह स्तर पर पहुँच गया है। एक डॉक्टर समूह द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, सूडानी अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) द्वारा किए गए एक ड्रोन हमले में कम से कम 50 लोग मारे गए हैं। मृतकों में एक बड़ी संख्या, लगभग 33 मासूम बच्चे, शामिल हैं, जिससे इस हमले की क्रूरता और भी अधिक स्पष्ट हो जाती है। यह हमला मुख्य रूप से कोर्डोफ़ान क्षेत्र को निशाना बनाते हुए किया गया था, जहाँ आरएसएफ और सूडानी सेना (एसएएफ) के बीच कई महीनों से खूनी संघर्ष चल रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ड्रोन ने एक ऐसे क्षेत्र को निशाना बनाया जहाँ बड़ी संख्या में विस्थापित नागरिक और उनके परिवार शरण लिए हुए थे। बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में मौत इस बात पर जोर देती है कि कैसे यह संघर्ष अब नागरिकों को सीधे तौर पर निशाना बना रहा है।

डॉक्टर समूह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस युद्ध अपराध की कड़ी निंदा करें और सूडान में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें। आरएसएफ और एसएएफ के बीच सत्ता संघर्ष के कारण सूडान एक गहरे मानवीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और खाद्य सुरक्षा एवं चिकित्सा सहायता की भारी कमी है।

कोर्डोफ़ान, दारफुर और खारतूम जैसे क्षेत्रों में हिंसा अपने चरम पर है। इस विशेष हमले ने, जिसमें बच्चों को निशाना बनाया गया है, दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा है कि युद्ध के नियम और मानवाधिकार अब सूडानी धरती पर पूरी तरह से टूट चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रयास भी लगातार विफल हो रहे हैं।