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रतलाम के किसानों अनूठी हसरत! करारे कैश से 2 बोरी यूरिया और बंद हो जगराता

रतलाम: रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद के लिए लाईन लगाने का दौर शुरू हो गया है. जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए खाद वितरण केंद्रों पर किसान सुबह 4 बजे से ही लाइन में लगने को मजबूर हैं. रतलाम के दिलीप नगर स्थित खाद वितरण केंद्र पर महज 2 बोरी यूरिया लेने के लिए 35 किलोमीटर दूर से किसान पहुंच रहे हैं.

वहीं, जिला विपणन विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता है. रतलाम कलेक्टर द्वारा भी खाद वितरण केंद्रों का निरीक्षण और मॉनिटरिंग की जा रही है. बावजूद इसके खाद को लेकर मारा-मारी मची हुई है. खाद वितरण केंद्रों पर यूरिया की बोरी लेने खड़े किसानों का कहना है कि यदि उन्हें गांव में ही सरकारी समिति पर नगद में खाद मिल जाए तो उन्हें इस तरह लाइन नहीं लगानी पड़ेगी.

घंटों लाइन में खड़े होने के बाद मिल रही खाद

सहकारी सोसाइटियों में जिन किसानों का खाता नहीं है, उन्हें खाद लेने के लिए नकद खाद वितरण केंद्र या बाजार से महंगी खाद खरीदनी पड़ती है. हर वर्ष रबी सीजन में किसानों को इसी समस्या का सामना करना पड़ता है और खासकर यूरिया खाद के लिए इन खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भीड़ लग जाती है

इस वर्ष भी खाद की किल्लत न हो इसके लिए रतलाम जिला प्रशासन, कृषि विभाग और जिला विपणन विभाग ने खाद वितरण केंद्रों पर व्यवस्था सुधारने और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करने की व्यवस्था की थी. कलेक्टर मिशा सिंह ने कृषि और जिला विपणन अधिकारी के साथ खाद वितरण केंद्रों का निरीक्षण भी किया था और किसानों से चर्चा भी की थी. लेकिन खाद्य वितरण केंद्र पर पहुंच रहे किसानों को घंटों लाइन में खड़े होने के बाद खाद मिल पा रही है.

2 बजे रात से खाद वितरण केंद्र पहुंच रहे किसान

रतलाम के दिलीप नगर स्थित खाद वितरण केंद्र पर अलग-अलग गांव से पहुंचे किसानों ने बताया कि किसानों को 5 बीघा जमीन पर महज 2 बोरी यूरिया खाद मिल रही है. जबकि खाद लेने 40 से 50 किलोमीटर दूर से आना पड़ता है. चितावद गांव से आए गोकुल डामोर ने बताया कि “वह रात में 2 बजे ही खाद वितरण केंद्र पर लाइन में लगने के लिए आ गए थे.” जबकि टोकन सुबह से बंटना शुरू होता है.

वहीं, 30 किमी दूर नयन गांव से आए शंकर लाल का कहना है कि “वह भी सुबह 4:00 बजे लाइन में आकर लग गए थे. 8 घंटे के इंतजार के बाद उन्हें 5 बीघा जमीन की पावती पर 2 बोरी यूरिया मिल सकी है. किसान खेतों में सिंचाई या और काम करें या यहां आकर लाइन में लगें.”

किसान नेता राजेश पुरोहित ने बताया कि “प्रतिदिन यहां 200-300 किसानों की लंबी-लंबी कतार लगती है. यह हर बार की समस्या है. यदि शासन सहकारी समिति स्तर पर ही नगद खाद वितरण करने की व्यवस्था कर दे, तो किसानों को इतनी दूर तक खाद के लिए नहीं आना होगा और उनके समय की भी बचत होगी.”

‘3700 टन अतिरिक्त खाद का किया गया वितरण’

किसानों को खेती के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध करवाने को लेकर मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं. जिसे लेकर जिला प्रशासन और जिम्मेदार विभाग अलर्ट मोड पर हैं, लेकिन अधिकारियों के पर्याप्त खाद होने के दावे के विपरीत खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भीड़ कम होने का नाम ही नहीं ले रही है.

जिला विपणन अधिकारी यशवर्धन सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष ज्यादा मात्रा में खाद किसानों को अब तक दी जा चुकी है. करीब 3700 टन अतिरिक्त खाद इस वर्ष दी गई है. वर्तमान स्थिति में खाद की किसी प्रकार की किल्लत नहीं है. सहकारी सोसाइटियों से खाद के नगद पर वितरण के प्रश्न को लेकर शासन स्तर पर आदेश नहीं होने की बात जिला विपणन अधिकारी ने कही है.प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण और व्यवस्था सुधारने के दावों के बीच नगद खाद वितरण केंद्रों पर किसानों के रात में ही पहुंच जाने और लंबी-लंबी कतारें लगने का सिलसिला लगातार जारी है. किसानों ने खाद सहकारी सोसाइटियों में नगदी पर खाद दिलवाए जाने की मांग जिला प्रशासन एवं मध्य प्रदेश शासन से की है.