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हसदेव अरण्य में केते कोल कोल एक्सटेंशन को मिली पर्यावरण स्वीकृति, उठे सियासी सवाल

सरगुजा: हसदेव अरण्य में केते एक्सटेंशन की पर्यावरणीय स्वीकृति एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. घने जंगल, आदिवासी ग्राम सभाओं के विरोध और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, परियोजना को मिली अनुमति ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हसदेव के मसले पर अब सिर्फ ग्रामीण ही नही बल्कि संभाग के शहरी लोग भी परेशान हैं. उनका कहना है कि खदान का असर जंगल के साथ साथ प्राचीन विरासत रामगढ़ पर्वत पर भी पड़ेगा. इस मसले पर अब सियासत भी तेज हो चुकी है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव कहते हैं कि एक खदान कम खुलेगा तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा.

केते एक्सटेंशन को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से जो खदान चल रहे हैं उसका तो कुछ नहीं किया जा सकता. लेकिन जो नए खदान शुरू हो रहे हैं खासकर केते एक्सटेंशन उसको तो कम से कम रोका जाए. स्थानीय लोग नए खदान को शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पर रामगढ़ का ऐतिहासिक पहाड़ भी है जो आस्था का केंद्र है. खदान की वजह से पहले ही यहां पर काफी नुकसान हो चुका है. नए एक्सटेंशन से ऐतिहासिक स्थल को और अधिक नुकसान पहुंचेगा.

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मिली स्वीकृति

केते कोल एक्टेशन को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कोल खदान के लिए लैंड डायवर्जन की पर्यावरणीय स्वीकृति दे दी है. ये अनुमति केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइंस, पिट हेड कोल वासरी प्रोजेक्ट के लिए 1742.600 हेक्टेयर भूमि आबंटित करने की पर्यावरणीय स्वीकृति मिली है. इस क्षेत्रफल में 1742.155 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि है और 0.445 हेक्टेयर राजस्व भूमि है. गांव वालों का कहना है कि इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचेगा. कई हजार पेड़ काटे जाएंगे, लोगों का विस्थापन भी होगा.

हसदेव आंदोलन के जरिए उठाई आवाज

हसदेव आंदोलन में शामिल रहे लव दुबे कहते हैं कि ” कांग्रेस भी जब सत्ता में थी तो यही हुआ. अब बीजेपी सत्ता में है तो वही हो रहा है. सत्ता परिवर्तन के बावजूद भी कुछ नहीं बदला. इस सरकार में तो परमिशन तक मिल गया. कहा गया था कि विधानसभा में जो सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ उसके तहत आगे एक्सटेंशन नहीं होगा. इससे आगे की खुदाई भी नहीं होगी. लेकिन अब क्या होने जा रहा है ये सबको पता है.

रामगढ़ पहाड़ को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है. भगवान राम को पूजने और उसका नाम लेने वाली सरकार भी इसपर राजनीति कर रही है. हमारी आस्था और अस्मिता से खिलवाड़ किया जा रहा है. हमें जो विरासत में मिला है उसे बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है. केते एक्सटेंशन बढ़ेगा तो 1700 हेक्टेयर मतलब 4500 एकड़ के जंगल तो कटेंगे ही, लाखों पेड़ों की बलि दी जाएगी और साथ में रामगढ़ पहाड़ को निश्चित तौर पर नुकसान होगा, इसमें कोई संशय नहीं है. इसके बावजूद यदि ये सरकार कर रही है तो ये बेहद दुखद है. मैं ये कहना चाहूंगा कि यहां पेसा कानून है. बावजूद इसके यहां पर पांचवी अनुसूची की धज्जियां उड़ाई जा रही है. हम लोग इसका लगातार विरोध करते आए हैं और विरोध करते रहेंगे. समस्या यहां ये है कि लोकतांत्रिक विरोध को सरकार गंभीरता पूर्वक नहीं लेती: लव दुबे, हसदेव आंदोलन में शामिल युवा

माइंस खुलने से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है. अब फिर से नए एक्सटेंशन की अनुमति मिली है, ये पर्यावरण के लिए हानिकारक है. रामगढ़ पर्वत भी खतरे में है. इस तरह के कोल एक्सटेंशन अगर होंगे तो रामगढ़ पर्वत का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा. भाजपा और कांग्रेस की सरकार जनता के लिए नहीं बल्कि उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है: एलेक्जेंडर केरकट्टा, जनपद सदस्य

विपक्ष ने की फैसले की निंदा

इस मसले पर कांग्रेस नेता टी एस सिंहदेव ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार ने न तो विपक्ष की सुनी न पब्लिक की. सिंहदेव ने कहा कि हम सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे. सिंहदेव ने कहा, जरुरत पड़ी तो कानून की भी मदद लेंगे. हाई कोर्ट में हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता हैं हम उनके जरिए अपनी बात रख सकते हैं.

हम और हमारे साथियों ने इस विषय में पीएम कार्यालय से संपर्क किया था. हमने सभी संबंधित विभाग को बताया कि यहां पर ऐतिहासिक रामगढ़ पर्वत है. पर्वत पर ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है. केते एक्सटेंशन से इनको नुकसान पहुंचेगा. लेकिन हमारी कोई बात नहीं सुनी गई. रामजी का जो ऊपर मंदिर है वो सिर्फ 10 किमी के दायरे में आता है. बावजूद इसके केते एक्सटेंशन को मंजूरी मिलना दुर्भाग्यजनक है. अगर एक खदान नहीं खुलेगा तो किसी उद्योगपति को क्या फर्क पडे़गा: टीएस सिंहदेव, डिप्टी सीएम

बीजेपी विधायक का आरोप

भाजपा विधायक प्रबोध मिंज ने इस मसले पर कहा कि “परसा केते कोल माइंस का विवाद पुराना है. टीएस सिंहदेव जब डिप्टी सीएम थे तब उन्ही के विधानसभा में इसका काम शुरु हुआ. उनके ही कार्यकाल में लाखों पेड़ काटे गए. उनके वक्त में प्रोजेक्ट चालू रहा.

अब केते एक्सटेंशन को पर्यावरणीय स्वीकृति मिली है तो उस विषय को लेकर कांग्रेस बेवजह हमपर आरोप लगा रही है. हमारी पार्टी ने तो एक टीम बनाकर इसकी जांच भी की थी. हमने लोगों का भी ओपिनियन लिया. टीम ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी. अब ये सरकार का विषय है कि कैसे क्या करना है वो विचार करे. वहां पहले से ही खदान चल रहा है. सरकार गंभीरता से इस पर विचार कर आगे बढ़ेगी: प्रबोध मिंज, विधायक बीजेपी

विपक्ष का वार, सरकार का पलटवार

केते एक्सटेंशन को पर्यावरण मंजूरी मिलने पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा है. बघेल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जल, जंगल और जमीन उद्योगपतियों के हाथों में सौंप देना चाहती है. कांग्रेस के आरोपों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार सही और गलत में फर्क करना जानती है. सरकार की मंशा है कि लोगों को रोजगार दिया जाए. जब उद्योग और कल कारखाने लगेंगे तब लोगों को रोजगार मिलेगा.