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न्याय के तराजू पर बुलडोजर: CJI गवई ने कहा- ‘घर गिराने के मामले मेरा सबसे अहम फैसला’, जानिए CJI का पूरा रुख

भारत के लोकप्रिय चीफ जस्टिस बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गए हैं. यह वकील से देश के टॉप जज बनने के उनके चार दशक के सफर का अंत है. उनके साथियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनकी ईमानदारी, सादगी और अंबेडकर से प्रेरित ज्यूडिशियल फिलॉसफी को याद किया, जिसने ऐतिहासिक फैसलों को आकार दिया और इंस्टीट्यूशनल कामकाज को मजबूत किया.

उन्होंने अपने अंतिम कार्य दिवस पर कहा कि बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ दिया गया, उनका फैसला सबसे अहम था. वहीं राज्यों को नौकरी में रिजर्वेशन के लिए एससी-एसटी को सब-क्लासिफाई करने की इजाजत देने वाला दूसरे नंबर पर था.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के फेयरवेल कार्यक्रम में सीजेआई गवई ने इन फैसलों का उल्लेख सार्वजनिक तौर पर किया. यह परंपरा से हटकर था, क्योंकि यह पहला मौका था किसी सीजेआई द्वारा अपने फैसलों का जिक्र फेयरवेल फंक्शन में किया गया हो. सीजेआई गवई ने कहा कि अगर उनसे उनके द्वारा लिखा गया सबसे जरूरी फैसला चुनने के लिए कहा जाए तो वह बेशक बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ वाला होगा.

क्यों गलत है बुलडोजर जस्टिस?

उन्होंने कहा कि बुलडोजर जस्टिस कानून के खिलाफ है, सिर्फ इसलिए किसी व्यक्ति का घर कैसे गिराया जा सकता है, कि उस पर किसी जुर्म का आरोप है या वह उसके लिए दोषी है? उसके परिवार और माता-पिता की क्या गलती है? रहने की जगह का अधिकार एक मौलिक अधिकार है. सीजेआई गवई ने यह भी कहा कि वे अपने फैसले से संतुष्ट हैं क्योंकि उन्होंने बुलडोजर न्याय के खिलाफ निर्णय दिया.

मॉरीशस में भी की थी टिप्पणी

ये कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले मॉरीशस में भी उन्होंने बुलडोजर न्याय पर टिप्पणी की थी. चीफ जस्टिस गवई ने बुलडोजर एक्शन पर अपने ही 2024 के फैसले का जिक्र किया था, जिसे बुलडोजर केस के नाम से जाना जाता है. इस फैसले के बारे में बात करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, “इस फैसले में एक स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, बुलडोजर के शासन से नहीं.”