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धमतरी में शिक्षक का व्हाट्सएप स्टेटस बना सस्पेंशन का कारण, स्कूल में किताबों की कमी बताना पड़ा महंगा

धमतरी: जिले में स्कूल के हालात का स्टेटस लगाना एक शिक्षक के लिए सस्पेंशन का कारण बन गया. स्टेटस में वे बच्चों की पीड़ा को लेकर शासन प्रशासन को कोस रहे थे. पुस्तक नहीं मिलने की परेशानी बयां कर रहे थे. इसी बीच बीच शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाले शिक्षक ढालूराम साहू को जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल निलंबित कर दिया. अधिकारी इसे सिविल सेवा आचरण का उल्लंघन बता रहे हैं.

क्या है मामला: दरअसल धमतरी जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर कुरूद ब्लॉक का गांव है नारी. यहां सरकारी नवीन प्राथमिक शाला में किताबों की कमी से बच्चे जूझ रहे हैं. कक्षा चौथी में कुल 21 बच्चे दर्ज हैं, इनमें से 11 बालक और 10 बालिकाएं हैं. स्कूल शिक्षण को आधा सत्र बीतने को है लेकिन हिंदी विषय की एक भी नई किताब स्कूल को शिक्षा विभाग की ओर से नहीं मिली है.

व्हाट्सएप स्टेटस पर शिक्षक ने कोसा: बच्चे पुरानी किताबों के सहारे पढ़ने को मजबूर हैं. जो बच्चे किताब पढ़ रहे हैं वह महज़ 8 पुरानी किताबें हैं, जिनसे तीन-तीन बच्चे मिलकर पढ़ते हैं. पढ़ाई के दौरान किताब को लेकर झगड़े की नौबत तक आ जाती है. ऐसे हालात देखकर शिक्षक ने इसे अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर लिख दिया. विभाग ने इस मामले को अनुशासनहीनता मानते हुए टीचर को तत्काल निलंबित कर दिया.

स्टेटस में क्या लिखा था: नवीन प्राथमिक विद्यालय नारी के शिक्षक ढालूराम साहू ने लिखा था कि बच्चों की शिक्षा व्यवस्था ठप और हम चले राज्योत्सव मनाने, क्या हम राज्योत्सव मनाने लायक हैं? हमारे जनप्रतिनिधियों को ये सब नहीं दिखता. जहां खाने-पीने को मिले, वहीं पर काम करते हैं. जब तक बच्चों को पूरी पुस्तकें नहीं मिल जाती, सहायक शिक्षक से लेकर कलेक्टर और शिक्षा मंत्री तक का वेतन रोक देना चाहिए.

कार्रवाई के बाद टीचर ने क्या कहा: निलंबित शिक्षक ढालूराम साहू ने कहा कि मैं बहुत दिनों से देख रहा हूं कि शासन पुस्तकों के प्रति उदासीन है. पुस्तक की उपलब्धता पर रुचि नहीं दिखता. जैसे चल रहा है वैसे चलने दें. आज साढ़े पांच माह बीत गया है. कक्षा चौथी के बच्चों को हिंदी पुस्तक प्राप्त नहीं हुई है. बच्चों की समस्या को लेकर पीड़ा को देखते हुए स्टेटस डाला था. जो स्टेटस डाला था वो सही है. पुस्तक की जानकारी संकुल समन्वयक को दी गई थी उनका जवाब रहता था कि जब भी पुस्तक आएगी दे दी जाएगी.

मुझे अंदाजा था कि मैं उच्च अधिकारियों के बारे में लिख रहा हूं तो एक्शन हो सकता है. स्टेटस डालकर किसी को तकलीफ देना मेरा उद्देश्य नहीं था. मुझसे निलंबन से पहले स्पष्टीकरण मांगा गया था मैंने स्पष्टीकरण दिया फिर भी मुझे निलंबित कर दिया गया. अभिव्यक्ति पर शासन अंकुश लगा रहा है. – ढालूराम साहू, शिक्षक

teacher suspended WhatsApp status

DEO ने क्या कहा: इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल ने कहा कि, शासकीय सेवा में रहते हुए शिक्षक ने शासन के खिलाफ पोस्ट डाली है. जो शासकीय सेवा के आचरण के खिलाफ है. उन्हें प्रथम दृष्टिया निलंबित किया गया है. आरोप पत्र जारी कर जांच की जाएगी. शिक्षक के खिलाफ पहले किसी तरह की शिकायत की मुझे जानकारी नहीं है. जहां तक किताबों की बात है तो वह चरणबद्ध तरीके से आई है. संकुल समन्वयक के माध्यम से स्कूलों में वितरित की गई है.

पहले किताबों की कमी दिखी थी लेकिन बाद में शासन की ओर से उसकी पूर्ति कर ली गई है. अगर अभी कमी है तो नारी स्कूल में परीक्षण करवाया जाएगा.– अभय जायसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी

क्या है जमीनी हकीकत: ईटीवी भारत की टीम ने जिला शिक्षा अधिकारी से सवाल किया तो उन्होंने दावा किया कि स्कूल में पुस्तकें वितरित हो चुकी हैं. वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है. बच्चे खुद बता रहे हैं कि अब तक हिंदी की नई किताबें नहीं मिली हैं.

एक तरफ राज्य सरकार राज्योत्सव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. वहीं दूसरी ओर गांव के स्कूलों में बच्चे बिना किताबों के पढ़ने को मजबूर हैं और जब कोई शिक्षक इस सच्चाई को सामने लाता है, तो सिस्टम उसे सस्पेंड कर दिया जाता है.