विवादास्पद विज्ञापन से बढ़ी नाराजगी को दूर करने का प्रयास
ओटावाः कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से माफ़ी मांगनी पड़ी, जब ओंटारियो प्रांत के एक विज्ञापन में टैरिफ के खिलाफ रोनाल्ड रीगन की छवि का उपयोग किया गया। यह घटना कनाडा और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण व्यापारिक संबंधों में एक और कूटनीतिक तनाव का बिंदु बन गई। ट्रंप प्रशासन ने इस विज्ञापन को एक सहयोगी देश द्वारा अमेरिकी नीतियों की आलोचना के रूप में लिया और इसे अपमानजनक बताया।
कनाडा की सरकार ने जल्दी से इस मामले को संभालने का प्रयास किया, यह समझते हुए कि व्यापार युद्ध के दौर में अमेरिका के साथ अनावश्यक कूटनीतिक टकराव उनके आर्थिक हितों के लिए हानिकारक हो सकता है। प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट किया कि विज्ञापन के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार नहीं थी, लेकिन उन्होंने ट्रंप से माफ़ी मांगी ताकि इस मुद्दे को शांत किया जा सके।
इस घटना ने यह दर्शाया कि किस तरह आर्थिक विवाद अब केवल व्यापारिक टैरिफ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं। कार्नी ने इस संदर्भ में यह भी ज़ोर दिया कि कनाडा भविष्य में अपनी आर्थिक संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में काम कर रहा है।
यह विवाद उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते के बाद के युग में कनाडा-अमेरिका संबंधों की नाजुकता को दर्शाता है। दोनों देश एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार हैं, लेकिन टैरिफ और व्यापार नियमों को लेकर मतभेद लगातार तनाव पैदा कर रहे हैं। कार्नी की माफ़ी एक कूटनीतिक संतुलन बनाने का प्रयास था, जिसका उद्देश्य व्यापारिक वार्ता को पटरी से उतरने से बचाना और कनाडा के आर्थिक हितों की रक्षा करना था। यह घटना दुनिया भर के नेताओं के लिए एक सबक है कि व्यापारिक विवादों में राजनीतिक प्रतीकवाद और बयानों का इस्तेमाल कितना महंगा पड़ सकता है। इस घटना के बाद, दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ताएं जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन आपसी विश्वास को बहाल करने में समय लग सकता है।