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नोबल पुरस्कार पर भी जासूसी का खतरा

मारिया कोरिन माचाडो का नाम पहले ही लीक होने पर सवाल

ओस्लोः नोबेल इंस्टीट्यूट को संदेह है कि जासूसी के कारण नाम लीक हुआ है, जिसमें वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिन माचाडो को इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के रूप में घोषित होने से पहले ही खुलासा कर दिया गया। नॉर्वेजियन मीडिया ने बताया कि इस गड़बड़ी का संबंध जासूसी से अत्यधिक संभावित है।

आधिकारिक घोषणा से कुछ घंटे पहले पॉलीमार्केट नामक सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर माचाडो के यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीतने की संभावनाएँ रातों-रात 3.75 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 73 प्रतिशत हो गईं। इस भारी उछाल ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या गोपनीय जानकारी लीक हुई थी, क्योंकि घोषणा से पहले किसी भी विशेषज्ञ या मीडिया आउटलेट ने माचाडो को अग्रिम पंक्ति के उम्मीदवारों में नामित नहीं किया था।

नोबेल इंस्टीट्यूट के निदेशक और नोबेल समिति के सचिव, क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन ने नॉर्वे के टीवी2 टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, जासूसी की अत्यधिक संभावना है। हार्पविकेन ने कहा कि संस्थान इस मामले की जांच करेगा और जहां आवश्यक होगा, हम सुरक्षा को और कड़ा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जासूसी से ऐसा लग सकता है कि अंदर के किसी व्यक्ति ने जानबूझकर जानकारी लीक की हो।

इसकी संभावना नहीं है। उन्होंने जोड़ा, निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह कोई रहस्य नहीं है कि नोबेल इंस्टीट्यूट जासूसी का विषय है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि यह संस्थान उन तत्वों के लिए रुचि का केंद्र है जो जानकारी हासिल करना चाहते हैं, चाहे वे राज्य हों या अन्य संगठन। इसके मकसद राजनीतिक और आर्थिक दोनों हो सकते हैं। यह कई दशकों से चल रहा है।

इसके विपरीत, नोबेल समिति के अध्यक्ष, जोर्गेन वाटनी फ्राइडनेस ने आंतरिक गड़बड़ी की धारणा को खारिज कर दिया। फ्राइडनेस ने नॉर्वे की एनटीबी समाचार एजेंसी को बताया, मुझे नहीं लगता कि पुरस्कार के पूरे इतिहास में कभी कोई लीक हुआ है। मैं कल्पना नहीं कर सकता कि ऐसा हुआ होगा।

गौरतलब है कि नोबेल शांति पुरस्कार चयन दुनिया की सबसे गोपनीय प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें घोषणा से पहले केवल मुट्ठी भर लोग ही अंतिम निर्णय से अवगत होते हैं। वेनेजुएला के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से वंचित माचाडो को वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण तथा शांतिपूर्ण बदलाव लाने के उनके संघर्ष के लिए सम्मानित किया गया।

इस पुरस्कार ने विश्व स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को फिर से हवा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार चाहते थे, ने अपने कार्यालय के माध्यम से इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे शांति पर राजनीति का प्रतिबिंब बताया।