महानगरों का ऐसा हाल तो देश सतर्क हो जाए
पिछले कुछ दिनों से कोलकाता में हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बारिश की वजह से शहर में 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 9 मौतें कोलकाता में ही हुई हैं।
यह पिछले 40 सालों में हुई सबसे अभूतपूर्व बारिश मानी जा रही है। मौसम विभाग ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोलकाता में एक दिन में इतनी बारिश 39 साल बाद हुई है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालात का जायजा लें तो, शहर में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है और सामान्य स्थिति बहाल हो रही है।
लेकिन इस बीच, एक और दुखद खबर सामने आई है। मंगलवार शाम को एक और व्यक्ति की आपदा से मौत हो गई। पिछले 24 घंटों में अकेले कोलकाता में 9 लोगों की जान चली गई है। अगर हम दक्षिण 24 परगना जिले को भी शामिल करें, तो आपदा में मरने वालों की संख्या 10 हो चुकी है। 39 वर्षों के बाद एक ही दिन में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई।
इस साल सितंबर महीने में हुई बारिश की बात करें तो, कोलकाता में यह अब तक का छठा सबसे अधिक बारिश वाला महीना रहा है। सबसे अधिक बारिश 28 सितंबर 1978 को हुई थी, उसके बाद 18 जून 1908 को 303.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हुई बारिश पिछले तीन हफ्तों में हुई कुल बारिश से 69.9 मिलीमीटर अधिक थी।
1 सितंबर से 22 सितंबर तक, कोलकाता में कुल 178.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। भारी बारिश के कारण, शहर के उन हिस्सों में भी पानी भर गया जहाँ सामान्य तौर पर पानी जमा नहीं होता। लगभग हर अस्पताल में पानी भर गया, जिससे मरीजों और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बाधित होने के कारण, मंगलवार को भी अस्पताल के अधिकांश कर्मचारी काम पर नहीं पहुँच सके। नेशनल मेडिकल कॉलेज, एसएसकेएम, एनआरएस, और अन्य सभी प्रमुख अस्पतालों में यही स्थिति थी। शहर के स्कूल-कॉलेज बंद रहे और शिक्षा मंत्री ने समय से पहले छुट्टी घोषित कर दी।
इस बीच, 98 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसने कोलकाता में बादल फटने जैसी स्थिति पैदा कर दी। सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह तक, कोलकाता में केवल 6 घंटों में मूसलाधार बारिश हुई। बाद में साफ हुआ कि यह दरअसल बादल फटने जैसी घटना नहीं थी। इस दौरान 9 नागरिकों की मौत हो गई। दुखद बात यह है कि इनमें से किसी की भी मौत बिजली गिरने से नहीं हुई।
सभी मौतें जलभराव के कारण बिजली का करंट लगने से हुईं। बरसाती कोलकाता में पहले भी स्ट्रीट लाइटों और ट्रांसफार्मरों के कारण कई हादसे हो चुके हैं, और यह दुखद सिलसिला 23 सितंबर को भी जारी रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 लोगों की मौत बिजली के झटके से हुई, जिनमें से 7 की मौत जलभराव वाली सड़क पर करंट लगने से हुई।
मृतकों में एक 25 साल का युवक भी शामिल था। गरिया के महामायापुर स्कूल रोड निवासी इंद्रजीत बर्मन की मंगलवार शाम करीब 6 बजे करंट लगने से मौत हो गई। इंद्रजीत जिस इलाके में रहता था, वहाँ सुबह से ही बिजली नहीं थी। वह शाम को अपने दोस्त के फ्लैट पर गया था। जैसे ही उसने आवास के गेट को छुआ, उसे बिजली का झटका लगा और उसकी मौत हो गई।
इस आपदा को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। नगरपालिका और राज्य सरकार का कहना है कि जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, और वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष का दावा है कि केवल 6 घंटे की बारिश ने यह साबित कर दिया है कि सरकार और प्रशासन कितने अक्षम हैं।
विपक्ष का मानना है कि यदि सरकार ने जल निकासी व्यवस्था और बिजली के बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया होता, तो ऐसी दुखद घटनाएँ रोकी जा सकती थीं। इस आपदा ने शहर के बुनियादी ढांचे की कमजोरियों को उजागर किया है और यह भी साबित किया है कि कोलकाता अभी भी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयार नहीं है।
इस घटना से सबक लेते हुए सरकार को भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वरना मौसम की इस किस्म की चुनौती से निपटने में सरकारें कितनी सक्षम है, इसका खुलासा पश्चिम बंगाल की राजधानी के हाल ने कर ही दिया है, जहां लोगों को उनके भाग्य भरोसे छोड़ दिया गया।