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पीएम के भागने के बाद सेना ने सत्ता संभाली

सत्ता पलट के बाद भी भड़की हुई है नेपाल की जेन जेड की आग

राष्ट्रीय खबर

काठमांडूः नेपाल में हाल ही में एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। जेन-जेड युवाओं के एक सोशल मीडिया आंदोलन ने देखते ही देखते एक बड़े राजनीतिक बदलाव का रूप ले लिया। नेपो किड्स के आलीशान जीवनशैली के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन, कुछ ही दिनों में प्रधानमंत्री को सत्ता से हटाने और देश में वर्षों बाद सबसे घातक सामाजिक अशांति का कारण बन गया।

राजधानी काठमांडू में, बुधवार सुबह काले धुएं के गुबार उठ रहे थे। सैनिक सड़कों पर कर्फ्यू लागू कर रहे थे। चारों तरफ एक तनावपूर्ण शांति पसरी हुई थी। ऐसी अफवाहें फैल रही थीं कि इस युवा आंदोलन, सेना और राष्ट्रपति के बीच कोई बैठक हो सकती है। यह शांति दो रातों की भारी अराजकता के बाद आई थी, जब हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। उन्होंने अपना गुस्सा दिखाते हुए संसद और सुप्रीम कोर्ट जैसी प्रमुख सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। इन प्रदर्शनकारियों की सरकारी सुरक्षा बलों से भी हिंसक झड़पें हुईं।

इस अशांति की शुरुआत सितंबर की शुरुआत में हुई थी। कुछ युवा नेपाली, जो राजनेताओं के बच्चों को महंगे बैग और विदेशी यात्राओं का दिखावा करते देख तंग आ चुके थे, एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए एकजुट हुए। जहां आम लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहीं ये युवा अमीर वर्ग और आम जनता के बीच बढ़ती खाई से बेहद नाराज थे।

सालों से युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक अवसरों की कमी को लेकर असंतोष पनप रहा था। यह असंतोष तब और बढ़ गया जब पिछले हफ्ते सरकार ने 24 से अधिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप शामिल हैं, पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रदर्शन में शामिल हुई सरीशा श्रेष्ठ ने बताया कि लोगों में लंबे समय से भरा हुआ गुस्सा ही इस आंदोलन का कारण था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगे बैन को आखिरी तिनका बताया, जिसने आग में घी का काम किया।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में नेपाल में 15-24 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 20.8 फीसद थी। इसी वजह से बहुत से युवा काम की तलाश में विदेश जाने को मजबूर हैं। विश्व बैंक के मुताबिक, नेपाल की जीडीपी का एक-तिहाई से अधिक (33.1 प्रतिशत) हिस्सा विदेश में रहने वाले नेपालियों द्वारा भेजे गए पैसों से आता है, और पिछले तीन दशकों में यह आंकड़ा लगातार बढ़ा है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल एक फिल्म निर्माता प्रमिन ने कहा, सोशल मीडिया ही एकमात्र ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां हम बात कर सकते हैं, अपनी बातें साझा कर सकते हैं और दुनिया भर के समाचारों से जुड़ सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि हमारे ज्यादातर दोस्त, परिवार और भाई-बहन देश से बाहर हैं, और यही हमारी उनसे बातचीत का जरिया था। नेपाल की 3 करोड़ की आबादी में यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। अब सवाल यह है कि प्रधानमंत्री के सत्ता से हटने के बाद इस युवा आंदोलन का अगला कदम क्या होगा और नेपाल का भविष्य किस दिशा में जाएगा।