केरल के सांसदों और मुस्लिम लीग ने जताया अपना विरोध
राष्ट्रीय खबर
तिरुअनंतपुरमः केरल के विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने हाल ही में छत्तीसगढ़ में दो मलयाली ननों की गिरफ़्तारी पर कड़ा विरोध जताया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष सादिक अली शिहाब थंगल ने इस गिरफ्तारी को संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन बताया।
थंगल ने शनिवार को एक बयान में कहा, यह सिर्फ़ झूठी गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि हमारे संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता के मूल विचार पर हमला है।रेलवे पुलिस ने सिस्टर वंदना फ्रांसिस और सिस्टर प्रीति मैरी को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से मानव तस्करी (भारतीय न्याय संहिता की धारा 143) और धर्मांतरण (छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4) के आरोपों में गिरफ्तार किया। उन्हें 8 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
कांग्रेस महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं को लिखे एक पत्र में गिरफ्तारियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि ये नन असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट की सदस्य हैं, जो आगरा में एक अस्पताल चलाती हैं। वे तीन युवतियों के साथ अस्पताल में नौकरी के लिए दुर्ग आई थीं।
सिस्टर वंदना उदयगिरि की निवासी हैं। थालास्सेरी, कन्नूर स्थित पैरिश में सिस्टर प्रीति मैरी और अंगमाली, एर्नाकुलम स्थित एलावूर पैरिश में सिस्टर प्रीति मैरी को भेजा गया। वेणुगोपाल के अनुसार, जब नन को निशाना बनाया गया, तब वे माता-पिता की पूर्ण सहमति से रोजगार के उद्देश्य से तीन युवतियों के साथ थीं।
रिपोर्टों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की आक्रामक युवा शाखा, बजरंग दल के सदस्यों द्वारा स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन के बाद ये गिरफ्तारियाँ हुईं। उन्होंने ननों पर मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया। हिंदुस्तान टाइम्स ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि तीनों महिलाओं को अच्छी सुविधाओं और ₹8,000 से ₹10,000 के मासिक वेतन का वादा करके बहकाया गया था।
सादिक अली थंगल ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला जारी है। उन्होंने स्थिति को बेहद गंभीर बताया और सभी धर्मनिरपेक्ष नागरिकों से एकजुट होकर इन कार्रवाइयों का विरोध करने का आग्रह किया। इस बीच, कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप करने और ननों की रिहाई सुनिश्चित करने की अपील की है। राज्यसभा सदस्य जोस के. मणि ने भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की।