कानूनी सहायता समझौते को अंतिम रूप, प्रत्यर्पण संधि पर चर्चा जारी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः भारत और नेपाल ने अपने द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बुधवार (23 जुलाई, 2025) को गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, दोनों पड़ोसी देशों ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर एक समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है।
इसके साथ ही, एक संशोधित प्रत्यर्पण संधि पर भी सक्रिय रूप से चर्चा चल रही है, जिससे दोनों देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके। यह महत्वपूर्ण प्रगति 22 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित गृह सचिव स्तर की वार्ता के दौरान हुई।
इस उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने किया, जबकि नेपाल सरकार के गृह सचिव गोकर्ण मणि दुवादी ने नेपाली पक्ष का नेतृत्व किया। यह वार्ता दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की समीक्षा और उन्हें मजबूत करने पर केंद्रित थी।
गृह मंत्रालय ने विस्तार से बताया कि बातचीत के दौरान, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ सीमा प्रबंधन के संपूर्ण पहलुओं की गहन समीक्षा की और इसे और मज़बूत करने पर अपनी सहमति व्यक्त की।
उनके विचार-विमर्श में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे, जिनमें सीमा स्तंभों की मरम्मत और रखरखाव की आवश्यकता, सीमा पार आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के तरीके, सीमावर्ती ज़िला समन्वय समितियों के कामकाज में सुधार, और सीमावर्ती बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना शामिल था। विशेष रूप से, एकीकृत जाँच चौकियों, सड़कों और रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया, जो सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और आवाजाही को सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने विभिन्न सुरक्षा संबंधी संस्थानों के सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण पर भी चर्चा की, जिससे वे चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन में सहयोग को मजबूत करने के तरीके भी बातचीत का एक प्रमुख हिस्सा थे, जो दोनों देशों को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में सहायता करेंगे।
दोनों देशों ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का हार्दिक स्वागत किया। यह समझौता दोनों देशों को आपराधिक जांच में एक-दूसरे की सहायता करने में सक्षम बनाएगा, जिससे अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाना आसान होगा। इसके साथ ही, संशोधित प्रत्यर्पण संधि को शीघ्र पूरा करने की दिशा में काम करने पर भी सहमति व्यक्त की गई, जो अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगी और सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद करेगी।