यह भी सरकारी प्रचार बनकर ना रहे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन भारत की कूटनीतिक दूरदर्शिता का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है, विशेष रूप से पहलगाम आतंकवादी हमले और भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति समर्थन जुटाना और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने लाना है। पहलगाम में हुए वीभत्स आतंकवादी हमले और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों को रेखांकित किया।
ऐसे में, इन प्रतिनिधिमंडलों का गठन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत की एकजुटता और आतंकवाद के खिलाफ उसके दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करने का एक शक्तिशाली तरीका है। इस पहल के माध्यम से भारत दुनिया के सामने एक एकजुट, बहुधार्मिक, बहुजातीय और लोकतांत्रिक राज्य के रूप में अपनी छवि को फिर से स्थापित करना चाहता है।
यह एक ऐसा संदेश है जो पाकिस्तान के दो-राष्ट्र सिद्धांत के विपरीत है, जहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर जैसे नेता हिंदुओं और मुसलमानों के एक साथ रहने की संभावना को नकारते हैं। भारत का यह एकता का संदेश उन देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो अभी भी भारत और पाकिस्तान को एक इकाई के रूप में देखते हैं।
उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि पाकिस्तान का रास्ता विभाजन और असहिष्णुता का है, जबकि भारत का मार्ग एकता और समावेशिता का है। भारत ने दशकों की कड़ी मेहनत और अपने धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र तथा तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के माध्यम से वैश्विक स्तर पर एक मजबूत छवि बनाई है। इस छवि को बनाए रखने और उसे और अधिक सशक्त करने के लिए एक व्यवस्थित और एकजुट रुख की आवश्यकता है।
बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन भारत की इस बहुलतावादी पहचान का जीवंत प्रतीक है। इन प्रतिनिधिमंडलों में विभिन्न धर्मों, जातियों, भाषाओं और राजनीतिक विचारधाराओं के प्रतिनिधियों का समावेश भारत के उस मौलिक स्वप्न को दर्शाता है जिसके साथ भारत स्वतंत्र हुआ था – एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण जहां विविधता में एकता हो। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब पाकिस्तान लगातार विभाजनकारी नीतियों और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा दे रहा है। भारत के इन प्रतिनिधिमंडलों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्पष्ट करना है कि भारत न केवल एक लोकतांत्रिक देश है, बल्कि वह एक ऐसा राष्ट्र भी है जो अपनी विविधता को अपनी सबसे बड़ी शक्ति मानता है।
यह संदेश उन ताकतों के लिए एक करारा जवाब है जो भारत को उसकी आंतरिक भिन्नताओं के आधार पर विभाजित करने का प्रयास करती हैं।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण पहल को भाजपा या प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत गौरवगाथा में बदलने का गंभीर खतरा है। यदि इस पहल को पार्टी हितों या व्यक्तिगत पूजा में बदल दिया जाता है, तो इसका महत्व खत्म हो जाएगा और यह भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक उपलब्धियों को धक्का पहुंचाएगा।
ये प्रतिनिधिमंडल किसी एक राजनीतिक दल या नेता की ओर से नहीं, बल्कि भारत की ओर से बात करने के लिए भेजे गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरह से कुछ भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को महिमामंडित करने के लिए टिप्पणियां कीं, वह इस चिंता को और बढ़ाती है। ऐसे संवेदनशील समय में, इस पहल को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए था।
प्रतिनिधिमंडलों के चयन को लेकर विवाद और विपक्ष को देशद्रोही कहने की भाजपा नेताओं की लगातार प्रवृत्ति ने सरकार के एकता के संदेश को कमजोर किया है। विदेशी दौरों के दौरान इस तरह के विभाजनकारी बयानों या कृत्यों से बचना नितांत आवश्यक है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य विश्व मंच पर भारत की समग्र छवि और नीतिगत रुख को स्थापित करना होना चाहिए, न कि किसी एक राजनीतिक दल या नेता की छवि को चमकाना। यदि इस पहल को व्यक्तिगत पूजा या पार्टी प्रचार में बदल दिया गया, तो यह भारत की लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक उपलब्धियों को ही नुकसान पहुंचाएगा।
प्रतिनिधिमंडलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बयानों और कार्यों में राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। उन्हें उन साझा मूल्यों और सिद्धांतों पर जोर देना चाहिए जो भारत को एक मजबूत और स्थिर लोकतंत्र बनाते हैं।
उन्हें आतंकवाद के खतरे, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए। संक्षेप में, बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों का गठन प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता का एक शानदार उदाहरण है।
यह भारत की बहुलतावादी पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का एक अद्वितीय अवसर है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी ईमानदारी और निष्ठा से राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए उपयोग किया जाता है, बजाय इसके कि इसे किसी व्यक्ति या दल के राजनीतिक लाभ के लिए एक प्रचार उपकरण बनाया जाए।